82% घरों तक पहुँचा नल का पानी, हर घर नल से जल की ओर बढ़ा देश
ग्रामीण इलाकों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुँचाने की दिशा में चल रहे जल जीवन मिशन ने पिछले सात वर्षों में बड़ी प्रगति दर्ज की है। केंद्र सरकार के अनुसार, अब देश के 82 % से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल के माध्यम से पानी पहुँच चुका है। इसके साथ ही सरकार अब केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव में ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की भूमिका भी बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है।
इसी सोच के तहत जल जीवन मिशन के दूसरे चरण में ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के हवाले करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सरकार का मानना है कि जब स्थानीय समुदाय खुद जल योजनाओं की जिम्मेदारी संभालेगा, तो इनका संचालन अधिक प्रभावी और लंबे समय तक टिकाऊ बन सकेगा
82 % ग्रामीण परिवारों तक पहुँचा नल का पानी
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन शुरू होने के समय देश के केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों, यानी 16.71 % घरों में ही नल से जल की सुविधा उपलब्ध थी। इसके बाद मिशन के तहत 12.66 करोड़ नए ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन दिया गया। 18 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.89 करोड़ परिवारों (82.09 %) तक कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन पहुँच चुका है। मिशन का उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है, जिसकी गुणवत्ता भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस 10500) के अनुरूप हो।
अब पंचायतें संभालेंगी जल योजनाओं की जिम्मेदारी
जल जीवन मिशन के अगले चरण में सरकार जलापूर्ति योजनाओं का संचालन और रखरखाव ग्राम पंचायतों को सौंपने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 'समुदाय-प्रबंधित पाइप आधारित जलापूर्ति प्रणालियों पर मार्गदर्शिका' जारी की गई है।
इस व्यवस्था के तहत किसी भी जल योजना को पंचायत को सौंपने से पहले 15 दिनों का परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान ग्राम पंचायत, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति और पानी समिति के सदस्य मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि योजना पूरी तरह से सुचारु रूप से काम कर रही है।
महिलाओं की भी होगी अहम भूमिका
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी है कि जल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए व्यापक नीति तैयार की जाए। इसमें ग्राम पंचायतों को उपयोगकर्ता शुल्क तय करने का अधिकार देने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को शुल्क संग्रह और संचालन में शामिल करने की भी सिफारिश की गई है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और जल योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी।
जल अर्पण अभियान से बढ़ेगी जनभागीदारी
मंत्रालय ने 'जल अर्पण' पहल भी शुरू की है। इसे एक जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें जनप्रतिनिधि, ग्राम सभा और स्थानीय समुदाय सक्रिय रूप से शामिल होंगे।
इस पहल का उद्देश्य केवल नई जल योजनाओं का उद्घाटन करना नहीं, बल्कि लोगों में यह भावना विकसित करना भी है कि वे इन योजनाओं को अपनी संपत्ति समझकर उनकी देखभाल करें। सरकार का मानना है कि समुदाय की भागीदारी से जलापूर्ति व्यवस्था अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
जल जीवन मिशन 2.0 के लिए बढ़ा बजट
मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी देते हुए इसकी अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी। इसके साथ ही मिशन का कुल वित्तीय परिव्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, केंद्र सरकार का योगदान भी 2.08 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3.59 लाख करोड़ रुपये किया गया है। इसके तहत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को समग्र कार्यान्वयन एवं सुधार योजना (सीआईआरपी) तैयार करनी होगी, जिससे जल योजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी बेहतर ढंग से की जा सके।
जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल हर घर तक नल का पानी पहुँचाना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और नियमित पेयजल व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखना भी है।