समर्थ पोर्टल से आसान होगा राजस्व प्रबंधन, आत्मनिर्भर बनेंगी पंचायतें
ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। अब ग्राम और ब्लॉक पंचायतें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहेंगी, बल्कि अपने क्षेत्र के संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आय बढ़ाने की दिशा में भी काम करेंगी। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' और 'समर्थ पंचायत पोर्टल' की शुरुआत की है। साथ ही पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने के लिए मॉडल ओएसआर (स्वयं के राजस्व स्रोत) नियम भी जारी किए गए हैं।
केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इन पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय रूप से मजबूत और तकनीक से जुड़ी पंचायतें ही विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
पंचायतें खुद तलाशेंगी कमाई के नए रास्ते
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम और ब्लॉक पंचायतों को अपने क्षेत्र में मौजूद संसाधनों और संभावनाओं की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। पंचायतें ऐसे स्थानीय प्रोजेक्ट तैयार करेंगी, जिनसे नियमित आय हो सके और भविष्य में विकास कार्यों के लिए केवल सरकारी सहायता पर निर्भरता कम हो।
इन परियोजनाओं को तैयार करने में पंचायती राज मंत्रालय तकनीकी सहयोग देगा। वहीं, इनके लिए धन की व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय और बैंक ऋण के माध्यम से की जाएगी। इस पहल में नाबार्ड और हडको जैसे संस्थान भी सहयोगी होंगे।
चार साल में विकसित होंगी 350 परियोजनाएँ
सरकार ने अगले चार वर्षों में 350 राजस्व सृजन परियोजनाएँ विकसित करने का लक्ष्य रखा है। पहले वर्ष में 50 परियोजनाएँ, जबकि अगले तीन वर्षों में हर साल 100-100 परियोजनाएँ विकसित की जाएँगी। इस योजना के लिए वही ग्राम पंचायतें आवेदन कर सकेंगी, जिनकी संभावित वार्षिक आय कम से कम 50 लाख रुपये हो। वहीं, ब्लॉक पंचायतों के लिए यह सीमा एक करोड़ रुपये तय की गई है। विशेष श्रेणी के राज्यों को इन मानकों में कुछ छूट दी गई है। अब तक देश के 10 राज्यों में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए जागरूकता कार्यशालाएँ भी आयोजित की जा चुकी हैं।
'समर्थ पंचायत पोर्टल' से आसान होगा राजस्व प्रबंधन
केंद्र सरकार ने पंचायतों की आय का बेहतर प्रबंधन करने के लिए 'समर्थ पंचायत पोर्टल' भी शुरू किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से करदाता पंजीकरण, कर निर्धारण, ऑनलाइन भुगतान, राजस्व संग्रह और उसकी निगरानी जैसे सभी कार्य एक ही मंच पर किए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों की आय का रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी होगा और राजस्व संग्रह की प्रक्रिया भी तेज़ एवं आसान बनेगी।
इन राज्यों में शुरू हो चुका है पोर्टल
समर्थ पंचायत पोर्टल पर छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश पहले ही जुड़ चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन दोनों राज्यों में 51 लाख से अधिक करदाता पंजीकृत हो चुके हैं। अब तक 95 करोड़ रुपये के मांग नोटिस जारी किए गए हैं और 27 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व भी एकत्र किया जा चुका है। इसके अलावा महाराष्ट्र, मिजोरम, असम, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में भी इस पोर्टल को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
ग्रामीण विकास को मिल सकती है नई गति
यदि पंचायतें अपने क्षेत्र के संसाधनों का सही उपयोग कर नियमित आय अर्जित करने में सफल होती हैं, तो स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गति तेज़ हो सकती है। इससे छोटी-छोटी योजनाओं के लिए बार-बार सरकारी अनुदान का इंतजार कम होगा और पंचायतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार काम कर सकेंगी।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पंचायतें भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। डिजिटल तकनीक और स्वयं के राजस्व स्रोतों को बढ़ावा देकर इन्हें अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि यह पहल न केवल पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करेगी, बल्कि ग्रामीण विकास और जनभागीदारी को भी नई दिशा देगी।