पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने जारी की एडवाइज़री: पशुओं से दोपहर में काम न लें, छाया और पानी की करें व्यवस्था
इन्दौर जिले में लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने पशु मालिकों और आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। जिले में दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच तापमान लगातार 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया जा रहा है, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में विभाग ने सभी से अपील की है कि इस भीषण गर्मी के दौरान पशुओं से काम न लिया जाए और उन्हें सुरक्षित एवं ठंडे वातावरण में रखा जाए।
दोपहर के समय पशुओं को दें आराम
विशेषज्ञों के अनुसार, तेज धूप और अधिक तापमान में पशुओं से काम लेने पर उन्हें हीट स्ट्रेस, थकान और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दोपहर के समय सभी पालतू पशुओं को छायादार स्थान पर आराम देना बेहद जरूरी है। पशु मालिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पशु सीधे धूप के संपर्क में न रहें और उन्हें पर्याप्त विश्राम मिले।
छाया और पानी की समुचित व्यवस्था जरूरी
गर्मी के इस मौसम में पशुओं के लिए ठंडे और हवादार स्थान की व्यवस्था करना अनिवार्य है। साथ ही, साफ और ठंडा पेयजल लगातार उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि पशु डिहाइड्रेशन से बच सकें। पशुपालन विभाग ने सलाह दी है कि पशुओं के रहने के स्थान पर पानी का छिड़काव और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था भी की जाए, जिससे तापमान कम किया जा सके।
वन्य जीव और पक्षियों के लिए भी रखें पानी
गर्मी के कारण शहरी, ग्रामीण और वन क्षेत्रों में वन्य पशु-पक्षी भी पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहे हैं। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने घरों की छत, आंगन या आसपास के स्थानों पर पक्षियों और अन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्था करें। यह न केवल मानवीय कर्तव्य है, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है।
निराश्रित पशुओं के प्रति भी दिखाएं संवेदनशीलता
सड़कों पर रहने वाले निराश्रित पशु, विशेषकर कुत्ते, इस गर्मी में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उनके लिए भी पानी की व्यवस्था करना और उन्हें छाया उपलब्ध कराना समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयास जैसे पानी के बर्तन रखना या छायादार स्थान उपलब्ध कराना, इन पशुओं के जीवन को बचा सकता है।
सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का समय
भीषण गर्मी के इस दौर में पशुओं और पक्षियों की देखभाल केवल पशुपालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि हम सभी मिलकर थोड़ी-सी जागरूकता और संवेदनशीलता दिखाएं, तो कई बेजुबान जीवों को इस कठिन मौसम में राहत मिल सकती है।