सीतापुर जनपद के मछरेटा ब्लॉक के उमरापुर (पोस्ट–गुड़रिया) की निवासी श्रीमती सरिता यादव आज ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और सीखने की इच्छा से न केवल अपने परिवार की आय बढ़ाई, बल्कि अपने क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया।
कृषि विज्ञान केंद्र से ली ट्रेनिंग
सरिता यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके-2, कटिया, सीतापुर) से एक साल पहले प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसके बाद उन्होंने अपने घर पर पोषण वाटिका की शुरुआत की। इस पोषण वाटिका में वे लौकी, कद्दू, तुरई, भिंडी जैसी मौसमी सब्जियों की खेती कर रही हैं, जिससे उनके परिवार को ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं।
जैविक विधी से करती हैं खेती
उन्होंने खेती में प्राकृतिक एवं जैविक विधियों को अपनाया है। सरिता जी गोबर की खाद, बीजामृत, जीवामृत तथा कम्पोस्ट खाद का उपयोग कर रही हैं। विशेष बात यह है कि वे मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले अपशिष्ट (waste) का उपयोग कम्पोस्ट खाद बनाने में करती हैं, जिससे लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।
मशरूम, मिलेट्स और सहजन से बना रही हेल्दी प्रोडक्ट्स
इसके साथ ही सरिता यादव मशरूम, मिलेट्स (श्री अन्न) और सहजन (मोरिंगा) की खेती भी कर रही हैं। वे मशरूम और मिलेट्स का वैल्यू एडिशन कर रही हैं, जैसे-मशरूम पाउडर, मशरूम अचार , मिलेट्स से बने उत्पाद इत्यादि इन उत्पादों से उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
100 से अधिक महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि सरिता यादव केवल खुद तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने अपने स्वयं सहायता समूह (SHG)की महिलाओं को भी प्रशिक्षित और प्रेरित किया। अब तक वे लगभग 100 से अधिक महिलाओं को पोषण वाटिका अपनाने, मशरूम उत्पादन और मिलेट्स के उपयोग के लिए प्रेरित कर चुकी हैं।
महिलाओं की आय और पोषण स्तर दोनों में हुआ सुधार
सरिता यादव पोषण वाटिका, मशरूम एवं मिलेट्स को दैनिक आहार में शामिल करने के प्रति जागरूकता फैला रही हैं । उनके प्रयासों से क्षेत्र में सब्जी, मशरूम और मिलेट्स की क्लस्टर आधारित खेती का विकास हो रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय और पोषण स्तर दोनों में सुधार हो रहा है।
आज सरिता यादव न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि एक सशक्त प्रेरक के रूप में भी उभरकर सामने आई हैं। उनकी यह यात्रा दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।