Heatwave Alert: बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई किसानों की चिंता- लू और खेतों में आग से बचाव के लिए यूपी कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई जिलों में भीषण गर्मी तथा लू का असर देखा जा रहा है। ऐसे मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों और पशुपालकों के सामने स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों की चुनौती खड़ी हो जाती है। तेज धूप, गर्म हवाएं और सूखे खेतों के कारण जहां लू लगने का खतरा रहता है, वहीं खेतों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में काम करते समय सावधानी बरतें, पर्याप्त पानी साथ रखें और खेतों को आग से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम करें।
गर्मी के मौसम में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
अप्रैल से जून के बीच उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। इस दौरान तेज गर्म हवाएं चलती हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी, चक्कर, कमजोरी और लू लगने की समस्या बढ़ जाती है। खेतों में सूखी फसल अवशेष, भूसा और घास होने के कारण आग लगने का खतरा भी ज्यादा रहता है। कई बार बिजली ट्रांसफार्मर या तारों से निकली चिंगारी भी खेतों में आग का कारण बन जाती है। पशुओं पर भी गर्मी का असर पड़ता है और उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
खेत में काम करते समय पानी साथ रखें
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेत में काम करते समय और घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। तेज धूप में पसीना अधिक निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। ऐसे में पानी पीना लू से बचाव का सबसे आसान उपाय है।
दोपहर की तेज धूप से बचें
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों का काम सुबह जल्दी या शाम के समय करें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप में खेतों में काम करने से बचना चाहिए। इस समय लू लगने की संभावना सबसे अधिक रहती है। किसान सिंचाई, निराई-गुड़ाई और अन्य भारी काम सुबह या शाम के समय करें और दोपहर में छांव में आराम करें।
पशुओं को भी गर्मी से बचाना जरूरी
कृषि विभाग ने पशुपालकों से कहा है कि पशुओं को पर्याप्त पानी दें और उन्हें छाया में रखें। खुले धूप वाले स्थान पर पशुओं को बांधने से बचें। गर्मी के कारण पशु कमजोर पड़ सकते हैं, बीमार हो सकते हैं और दूध उत्पादन में भी कमी आ सकती है। इसलिए पशुओं के लिए साफ पानी, हरा चारा और ठंडी जगह की व्यवस्था करना जरूरी है।
खेतों में आग से बचाव के लिए विशेष सावधानी
खेतों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने किसानों को निर्देश दिया है कि ट्रांसफार्मर के आसपास 10×10 फीट क्षेत्र में निराई-गुड़ाई कर साफ रखें। वहां सूखी घास, भूसा या फसल अवशेष न रहने दें। यदि ट्रांसफार्मर से स्पार्किंग होती है तो आग फैलने का खतरा कम होगा। इसके अलावा खेतों के आसपास बीड़ी, सिगरेट या माचिस का उपयोग न करें। कटाई के बाद सूखे खेतों में आग बहुत तेजी से फैल सकती है। किसानों को पराली या फसल अवशेष जलाने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे पड़ोसी खेतों तक आग पहुंच सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब होती है।
लू लगने पर क्या करें?
अगर किसी किसान या मजदूर को तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो तो तुरंत उसे छाया में लिटाएं। पानी या ORS दें और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें। स्थिति गंभीर होने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं।
आपात स्थिति में कहाँ करें संपर्क?
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने किसानों के लिए राहत और सहायता के हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। आग लगने की स्थिति में फायर सेवा 101, किसी भी आपातकालीन स्थिति में 112, स्वास्थ्य सहायता के लिए एम्बुलेंस 108, राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष 1070 और कृषि विभाग टोल फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय किसान मौसम को ध्यान में रखकर ही काम की योजना बनाएं। खेत का भारी काम सुबह या शाम में करें, सिंचाई रात में करें और मशीनरी का उपयोग सावधानीपूर्वक करें। खेत में जाते समय पानी, गमछा, टोपी और मोबाइल साथ रखना भी जरूरी है। भीषण गर्मी के इस मौसम में किसान अगर थोड़ी सावधानी बरतें तो लू और खेतों में आग जैसी बड़ी घटनाओं से बच सकते हैं। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की यह सलाह किसानों और पशुपालकों दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फसल बचानी है तो सबसे पहले खुद, अपने परिवार और अपने पशुओं को सुरक्षित रखना जरूरी है।