चीन के फैसले से धड़ाम हुए यूरिया के दाम, भारत को मिली बड़ी राहत, आयात कीमतें 50% तक लुढ़कीं

Gaon Connection | Jun 11, 2026, 12:58 IST
चीन द्वारा यूरिया निर्यात पर ढील देने के बाद भारत के नवीनतम आयात टेंडर में यूरिया की कीमतें 50% से अधिक गिर गई हैं। NFL के टेंडर में 445-449 डॉलर प्रति टन की बोलियां मिली हैं। इससे किसानों और सरकार को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बढ़ती उर्वरक सब्सिडी और पश्चिम एशिया संकट से लागत पर दबाव बना हुआ है।

पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती उर्वरक सब्सिडी के बीच केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिलने के संकेत मिले हैं। भारत के हालिया यूरिया आयात टेंडर में कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) द्वारा 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए जारी टेंडर में 445-449 डॉलर प्रति टन (सीएफआर) तक की बोलियां प्राप्त हुई हैं जो अप्रैल में तय कीमतों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक कम हैं।



इस गिरावट का मुख्य कारण चीन द्वारा यूरिया निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देना माना जा रहा है। मार्च से नियंत्रित चल रहे चीनी निर्यात के दोबारा खुलने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ी है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है।



अप्रैल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी कीमत

अप्रैल में इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के टेंडर में 25 लाख टन यूरिया की खरीद के लिए पश्चिमी तट पर 935 डॉलर और पूर्वी तट पर 959 डॉलर प्रति टन की कीमत तय हुई थी। इसके मुकाबले जून के टेंडर में कीमतें आधे से भी कम हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के पूर्वी तट पर आने वाली यूरिया की बड़ी खेप चीन से आ सकती है, क्योंकि भौगोलिक निकटता के कारण वहां से आपूर्ति आसान और सस्ती पड़ती है।



17 लाख टन की मांग पर 62 लाख टन की पेशकश

NFL के 17 लाख टन यूरिया आयात टेंडर के मुकाबले कंपनियों ने करीब 62.4 लाख टन यूरिया की आपूर्ति के लिए बोलियां लगाई हैं। इनमें पूर्वी तट के लिए लगभग 31.7 लाख टन और पश्चिमी तट के लिए 30.7 लाख टन की पेशकश शामिल है। कुल मिलाकर 34 कंपनियों ने इस टेंडर में भाग लिया।



किसानों और सरकार दोनों को राहत

यूरिया की कीमतों में आई गिरावट का फायदा किसानों और सरकार दोनों को मिल सकता है। सरकार फिलहाल बढ़ते उर्वरक सब्सिडी बोझ से जूझ रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एलएनजी (LNG) और यूरिया की आयात लागत बढ़ गई थी, जिससे सब्सिडी का खर्च लगातार बढ़ रहा था। भारत अपनी वार्षिक यूरिया जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश की यूरिया उत्पादन प्रणाली भी काफी हद तक आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। उर्वरक क्षेत्र देश की कुल प्राकृतिक गैस खपत का लगभग 29 प्रतिशत उपयोग करता है।



अगस्त तक बनी रह सकती है राहत

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि कीमतों में यह नरमी अगस्त 2026 तक बनी रह सकती है। इसके बाद चीन फिर से निर्यात पर सख्ती कर सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें दोबारा बढ़ने की आशंका रहेगी।



पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा सब्सिडी का दबाव

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट में उर्वरक सब्सिडी का अनुमान 1.7 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। हालांकि पश्चिम एशिया संकट के चलते यह राशि बढ़कर 3.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकती है। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 2022-23 में उर्वरक सब्सिडी 2.5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।

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