शिवराज सिंह की किसानों से अपील: "जरूरत के हिसाब से करें खाद का इस्तेमाल" जानिए कहाँ और कैसे होती है मिट्टी की जाँच

Preeti Nahar | Jun 14, 2026, 16:45 IST
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को मिट्टी की सेहत का ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जरूरत से ज्यादा खाद का इस्तेमाल मिट्टी को नुकसान पहुंचाता है। मिट्टी की जांच के बाद ही उर्वरकों का प्रयोग करें। इससे खेती की लागत कम होगी और मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी।

मिट्टी हमारी खेती की सबसे बड़ी ताकत है। अगर मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो फसल भी अच्छी होगी और किसानों की आय बढ़ेगी। इसी सोच के साथ ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे खेतों में जरूरत से ज्यादा खाद का इस्तेमाल न करें और मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।



उन्होंने कहा, “धरती मां हमें जिंदगी देती है। जितनी जरूरत है उतना ही खाद डालें, तभी अपनी मिट्टी का स्वास्थ्य बचा पाएंगे।” उन्होंने किसानों को सलाह दी कि केवल दूसरे किसानों को देखकर या बिना जरूरत के खेतों में ज्यादा खाद डालने से बचें। अधिक मात्रा में खाद का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है।



मिट्टी जांच के बाद ही करें खाद का इस्तेमाल

शिवराज सिंह ने किसानों को बताया कि खेत की मिट्टी की जांच कराना बेहद जरूरी है। मिट्टी का नमूना लेकर लैब में जांच कराने से पता चलता है कि जमीन में किन पोषक तत्वों की कमी है और किस तत्व की कितनी मात्रा में जरूरत है।



उन्होंने कहा कि मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही खेत में खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे जहां खेती की लागत कम होगी, वहीं मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।



ज्यादा खाद से बचाएं खेत की सेहत

कई बार किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद में जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद डाल देते हैं। इससे शुरुआती समय में उत्पादन बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ने से फसलों की उत्पादकता पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि खेतों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण जरूरी है।



स्वस्थ मिट्टी से बेहतर होगी फसल

खेत की मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाना जरूरी है। मिट्टी जांच, संतुलित खाद का उपयोग, जैविक पदार्थों का इस्तेमाल और सही फसल प्रबंधन जैसे उपायों से मिट्टी की ताकत बनी रह सकती है। ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को यही संदेश दिया जा रहा है कि मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी और खेती बचेगी तो किसान समृद्ध होगा।



मिट्टी की जांच (Soil Testing) कैसे कराएं?

किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच आसानी से करा सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले खेत के अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी के नमूने लेने होते हैं। नमूना लेते समय ऊपर की घास और कचरा हटाकर करीब 15 से 20 सेंटीमीटर गहराई से मिट्टी लें और सभी नमूनों को मिलाकर एक प्रतिनिधि सैंपल तैयार करें।



- इस मिट्टी को नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग की मिट्टी जांच प्रयोगशाला या Soil Health Card केंद्र पर जमा किया जा सकता है। लैब में मिट्टी की जांच के बाद किसानों को रिपोर्ट मिलती है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, पीएच मान और अन्य पोषक तत्वों की स्थिति बताई जाती है।



- इसी रिपोर्ट के आधार पर किसान तय कर सकते हैं कि खेत में कितनी मात्रा में खाद और उर्वरक की जरूरत है। इससे अनावश्यक खाद का खर्च कम होता है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।

Tags:
  • soil testing
  • balanced fertilizer use
  • excessive fertilizer use
  • sustainable farming
  • soil health card scheme
  • soil nutrient management
  • reduce fertilizer use in agriculture
  • खेत बचाओ अभियान
  • Shivraj Singh Chauhan
  • शिवराज सिंह चौहान