Fertilizer Price: ईरान युद्ध में नरमी के बाद फर्टिलाइजर बाजार में स्थिरता के संकेत, कीमतों में आ सकता है बदलाव
ईरान युद्ध के दौरान वैश्विक फर्टिलाइजर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते नजर आ रहे हैं। वैश्विक निवेश बैंक RBC Capital Markets ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि युद्ध में तनाव कम होने के बाद उर्वरक बाजार “नॉर्मलाइजेशन” की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश सेगमेंट पर इसका असर अलग-अलग रहेगा।
नाइट्रोजन बाजार में सबसे ज्यादा असर, कीमतों में 50-60% उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध का सबसे ज्यादा असर नाइट्रोजन उर्वरकों पर पड़ा। मध्य पूर्व क्षेत्र वैश्विक यूरिया निर्यात का करीब 35-40% और नाइट्रोजन उत्पादन क्षमता का लगभग 10% हिस्सा रखता है। सप्लाई बाधित होने के कारण यूरिया की कीमतों में 50-60% तक उछाल आया। युद्ध से पहले जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत लगभग $300–350 प्रति टन थी, वहीं यह बढ़कर $500–600 प्रति टन तक पहुंच गई। अब तनाव कम होने के बाद कीमतों में धीरे-धीरे गिरावट या स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है।
गैस की कीमतों से तय होता है बाजार
विशेषज्ञों के अनुसार, नाइट्रोजन उर्वरक की कीमतें मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस पर निर्भर करती हैं। यूरोप में गैस की कीमतें युद्ध के दौरान काफी बढ़ गई थीं, जिससे उत्पादन लागत भी बढ़ी। इसी कारण CF Industries और LSB Industries जैसी कंपनियों के शेयर पहले ही इस महंगाई को दर्शा चुके हैं।
फॉस्फेट सेगमेंट पर दबाव, लागत ऊंची बनी हुई
फॉस्फेट उर्वरकों के क्षेत्र में स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सल्फर की कीमतें हाल ही में $200–250 प्रति टन के उच्च स्तर पर तय हुई हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। वहीं फॉस्फेट उर्वरकों की कीमतें $600 से घटकर $500 प्रति टन के आसपास आने की संभावना जताई जा रही है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
पोटाश में सीमित असर, कीमतें स्थिर
पोटाश सेगमेंट में स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित है। वैश्विक बाजार में पोटाश की कीमतें फिलहाल $300–350 प्रति टन के बीच बनी हुई हैं। अगर माल ढुलाई (freight) लागत कम होती है, तो इस सेगमेंट को कुछ फायदा मिल सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान युद्ध में नरमी के बाद फर्टिलाइजर बाजार धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, कच्चे माल की लागत, गैस की कीमतें और वैश्विक मांग जैसे कारक आगे भी कीमतों को प्रभावित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में बाजार संतुलन की ओर बढ़ेगा। ऐसे में निवेशकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को इन बदलावों पर नजर बनाए रखना जरूरी है