हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है तो अपनाए ये विधि, ऑफ-सीजन में भी मिलेगा हरे चारे का बेहतरीन विकल्प
How To Make Silage: पशुपालन करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है सालभर पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध कराना। गर्मियों, सूखे या सर्दियों के कुछ महीनों में हरे चारे की कमी हो जाती है, जिससे पशुओं के दूध उत्पादन और स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। ऐसे समय में साइलेज (Silage) किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। यह हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की ऐसी तकनीक है, जिससे पशुओं को ऑफ-सीजन में भी पौष्टिक आहार मिल सकता है।
क्या है साइलेज?
साइलेज हरे चारे जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, नेपियर घास या अन्य हरे चारे को काटकर विशेष तरीके से बिना हवा के सुरक्षित रखने की प्रक्रिया है। इसमें चारे को गड्ढे, प्लास्टिक बैग, ड्रम या साइलो टैंक में अच्छी तरह दबाकर बंद किया जाता है, जिससे उसमें किण्वन (fermentation) होता है। इस प्रक्रिया के बाद चारा लंबे समय तक खराब नहीं होता और उसकी पौष्टिकता भी बनी रहती है।
साइलेज बनाने की प्रक्रिया
साइलेज बनाने के लिए हरे चारे की फसल को सही अवस्था में काटा जाता है, जब उसमें पोषण भरपूर हो। इसके बाद चारे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उसमें जरूरत पड़ने पर गुड़ या यूरिया जैसे तत्व मिलाए जाते हैं। फिर इसे गड्ढे या साइलो में अच्छी तरह दबाकर हवा पूरी तरह बाहर निकाली जाती है और प्लास्टिक शीट से ढक दिया जाता है। लगभग 45 से 60 दिनों में साइलेज तैयार हो जाता है।
पशुओं को क्या होता है फायदा?
साइलेज पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक होता है और इससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे पशुओं को सालभर संतुलित आहार मिलता है और किसानों को महंगे चारे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। सूखे या बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भी यह चारा पशुपालकों के लिए राहत साबित होता है।
किसानों की लागत भी होती है कम
अगर किसान हरे चारे के मौसम में अतिरिक्त चारा सुरक्षित कर लेते हैं, तो ऑफ-सीजन में उन्हें बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे पशुपालन की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
क्यों बढ़ रही है साइलेज की मांग?
देश में डेयरी सेक्टर के बढ़ते विस्तार और पशुपालकों के बीच जागरूकता बढ़ने के कारण साइलेज की मांग तेजी से बढ़ रही है। कई किसान अब इसे व्यवसाय के रूप में भी अपना रहे हैं और तैयार साइलेज बेचकर अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और चारे की समस्या को देखते हुए साइलेज आने वाले समय में पशुपालन का अहम हिस्सा बन सकता है।