यूपी में गाँव-गाँव लगेंगे छोटे सीबीजी प्लांट, गौ-शालाएं बनेंगी आत्मनिर्भर, जानिए क्या है सरकार का पूरा प्लान

Gaon Connection | May 28, 2026, 11:35 IST
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उत्तर प्रदेश सरकार गाँवों में छोटे CBG प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है, जिनमें गोबर और जैविक कचरे से गैस व जैविक खाद तैयार होगी। सरकार का दावा है कि इससे किसानों की खेती लागत घटेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और गाँवों को स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी। जाने क्या कुछ बदला जाएगा इन सीबीजी प्लांटों के लगने बाद जिसमें प्राकृतिक खेती, गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और गोबर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसी रणनीतियाँ तैयार की जा रही है।
रासायनिक खाद पर खर्च घटेगा

उत्तर प्रदेश सरकार अब खेती को सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती। सरकार की नई रणनीति गाँवों में ऐसे मॉडल विकसित करने की है, जहाँ गोबर से गैस बने, खेतों के लिए जैविक खाद तैयार हो और किसानों की लागत भी कम हो। इसे लेकर कृषि एवं पशुधन विभाग की संयुक्त बैठक में छोटे और मध्यम स्तर के CBG प्लांट, प्राकृतिक खेती और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर बड़ा मंथन हुआ। सवाल यह है कि आखिर CBG प्लांट होता क्या है और इससे एक आम किसान को क्या फायदा मिलेगा?



क्या होता है CBG प्लांट?

CBG यानी “कंप्रेस्ड बायोगैस”। यह ऐसी गैस होती है जो गोबर, कृषि अवशेष और जैविक कचरे से तैयार की जाती है। गाँवों में अगर छोटे CBG प्लांट लगाए जाते हैं तो गोबर और जैविक अपशिष्ट को सड़ाकर उससे गैस बनाई जाती है। यही गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल हो सकती है। इस प्रक्रिया के बाद जो अवशेष बचता है, उससे जैविक खाद और लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार किया जाता है। यानी एक ही व्यवस्था से गैस भी मिलेगी और खेतों के लिए खाद भी।



किसान को इससे क्या फायदा होगा?

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सरकार का मानना है कि यदि गाँव स्तर पर छोटे CBG प्लांट लगाए जाते हैं तो किसानों को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं।



1. रासायनिक खाद पर खर्च घटेगा- गोबर आधारित जैविक खाद खेतों में इस्तेमाल होने लगेगी तो किसानों की यूरिया और डीएपी पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे खेती की लागत घटेगी।



2. मिट्टी की सेहत सुधरेगी- बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि गोबर और गोमूत्र आधारित खाद मिट्टी में कार्बन कंटेंट बढ़ाने में मदद करती है। इससे जमीन की उर्वरता लंबे समय तक बनी रह सकती है।



3. गोबर भी बनेगा कमाई का जरिया- गाँवों में अक्सर गोबर बेकार चला जाता है, लेकिन CBG प्लांट लगने के बाद यही गोबर ऊर्जा और खाद उत्पादन का साधन बन सकता है। इससे पशुपालकों की अतिरिक्त आय बढ़ सकती है।



4. गाँवों को मिलेगी स्वच्छ ऊर्जा- सीबीजी प्लांट से बनने वाली गैस का उपयोग ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इससे गांवों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घट सकती है।



बैठक में क्या-क्या कहा गया?

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लखनऊ में हुई संयुक्त बैठक में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने साफ कहा कि सरकार खेती को “टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी” बनाना चाहती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मॉडलों में किसानों के हित दिखाई दें, उन्हें अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए।



पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गौशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक खेती के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है। उनका कहना था कि गोबर और गोमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग से गौशालाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।



प्राकृतिक खेती की ओर क्यों बढ़ रही सरकार?

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि लगातार रासायनिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार प्राकृतिक खेती और जैविक मॉडल को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि खेती की लागत घटे और मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।



विशेषज्ञों ने बैठक में बायोचार, लिक्विड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर, गोबर खाद और प्राकृतिक खेती के कई मॉडल प्रस्तुत किए। उनका दावा था कि यदि इन्हें व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाए तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।



गाँवों में बदल सकती है खेती की तस्वीर

अगर सरकार का यह मॉडल जमीन पर सफल होता है तो आने वाले समय में गाँवों में गोबर सिर्फ कचरा नहीं रहेगा, बल्कि गैस, खाद और कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है। इससे खेती की लागत कम करने, मिट्टी बचाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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