4 जून तक बिगड़ेगा मौसम: भीषण गर्मी और लू के बीच किसानों के लिए बड़ी सलाह, जानिए फसलों का कैसे रखें ध्यान?

May 29, 2026, 16:25 IST
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उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) ने 29 मई से 4 जून 2026 तक के लिए मौसम आधारित फसल सलाह जारी की है। परिषद ने तेज गर्मी, लू और गर्म रातों को देखते हुए धान, जायद फसल, मक्का, गन्ना, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को अलग-अलग सावधानियाँ बरतने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश के किसान जान लें कि इन फसलों की समय रहते कैसे करें देखभाल।

उत्तर प्रदेश में अगले एक सप्ताह तक पड़ने वाली भीषण गर्मी और लू का असर खेती पर भी पड़ सकता है। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) ने किसानों के लिए विस्तृत फसल सलाह जारी की है। परिषद ने कहा है कि तेज तापमान और गर्म हवाओं के कारण खेतों की नमी तेजी से कम हो सकती है, जिससे फसल, पशु और मत्स्य पालन प्रभावित हो सकते हैं। किसानों को फसलवार प्रबंधन और रोग नियंत्रण के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।



धान की खेती: अभी नर्सरी तैयार करने का सही समय

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कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार धान की नर्सरी डालने के लिए यह उपयुक्त समय है। किसानों को महीन दाने वाली प्रजातियों के लिए 30 किलोग्राम, मोटे दाने वाली प्रजातियों के लिए 40 किलोग्राम और संकर धान के लिए 12-15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करने की सलाह दी गई है।



सिंचित भूमि के लिए सुझाई गई किस्में- एनडीआर-2064, एनडीआर-2065, एनडीआर-359, एनडी-3112-1, सरजू-52, एचयूआर-1304, एचयूआर-1309, पंत धान-10 और पूसा-44।



सिंचाई रहित भूमि के लिए किस्में- एनडीआर-9930111, एनडीजीआर-201, एनडीजीआर-702, सांवा महसूरी सब-1 और स्वर्णा सब-1।



सुगंधित धान की प्रजातियां- पूसा नरेंद्र कालानमक-1, पूसा नरेंद्र कालानमक-2, एनडीआर-6093, नरेंद्र लालमती, पूसा बासमती-1, पूसा बासमती-4, पूसा-5, टाइप बासमती-22, मालवीय सुगंध-105, मालवीय सुगंध-4 और मालवीय सुगंध-1।



बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए सलाह- जलभराव वाले क्षेत्रों में आईआर-64 सब-1 और सांवा महसूरी सब-1 जैसी किस्मों की सलाह दी गई है।



जायद फसलों की खेती: खेत में नमी बनाए रखना जरूरी

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तेज गर्मी को देखते हुए किसानों को जायद फसलों में जरूरत के अनुसार सिंचाई करने की सलाह दी गई है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई और मल्चिंग उपयोगी मानी गई है।



पीला चितकबरा (मोजेक) रोग से बचाव- यदि पौधों में पीला चितकबरा रोग दिखाई दे तो संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करने को कहा गया है।





सफेद मक्खी नियंत्रण के उपाय- इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 5 मिली मात्रा 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।





मक्का की खेती: तना छेदक और फॉल आर्मी वर्म से सावधान

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कृषि परिषद ने कहा है कि गर्मी के कारण मक्का की फसल में कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है।



तना छेदक से बचाव- इमामेक्टिन बेंजोएट एसजी 200 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 250-300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।



फॉल आर्मी वर्म का खतरा- फसल में फॉल आर्मी वर्म दिखाई देने पर 4-5 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ निगरानी के लिए लगाएं, 15 ट्रैप प्रति हेक्टेयर मास ट्रैपिंग के लिए प्रयोग करें



रासायनिक नियंत्रण- क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 20 एससी की 125 मिली मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।



देर से बोई जाने वाली किस्में- एचक्यूपीएम-4, एचएम-3904, पीएमएच-3, एचक्यूपीएम-5, एनएच-61, एचएम-1, सीएम-2324 और बुलंद जैसी किस्मों की सलाह दी गई है।



गन्ना किसानों के लिए जरूरी सलाह

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पेड़ी गन्ने की देखभाल- शरदकालीन गन्ने में पर्याप्त कल्ले निकलने के लिए मिट्टी चढ़ाने की सलाह दी गई है।



ज्यादा पैदावार के लिए- समय-समय पर सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और निराई-गुड़ाई करते रहें।



चोटी बेधक कीट से बचाव- यदि प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी की 150 मिली मात्रा 400 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ ड्रेंचिंग करें।



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