चीनी के भाव ने छुआ रिकॉर्ड स्तर, सरकार आयात शुल्क घटाकर बढ़ा सकती है सप्लाई, गन्ने की फसल पर भी मौसम की मार
देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और त्योहारी सीज़न से पहले इसकी मांग और बढ़ने की उम्मीद है। महाराष्ट्र में चीनी का एक्स-मिल भाव करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। ऐसे में घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार आयात के रास्ते पर विचार कर रही है। चीनी के आयात पर फिलहाल 100 प्रतिशत शुल्क लगता है। अगर यह शुल्क घटाया जाता है या पूरी तरह हटा दिया जाता है, तो विदेशों से चीनी की आवक बढ़ सकती है और घरेलू बाजार में उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चीनी के आयात पर मौजूदा 100 प्रतिशत शुल्क घटाने या हटाने के प्रस्तावों पर विचार कर रही है। यह कवायद ऐसे समय हो रही है जब अगस्त के अंत से जनवरी तक देश में चीनी की खपत आम तौर पर बढ़ जाती है। दूसरी तरफ, गन्ने की फसल को मानसून की कमी से भी चुनौती मिल रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 16 अगस्त तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है। जून के अंत में बारिश की कमी 40 प्रतिशत से ज्यादा थी। ऐसे में आने वाले महीनों में चीनी की उपलब्धता और कीमत दोनों पर नज़र बनी हुई है।
आयात शुल्क घटाकर बढ़ाई जा सकती है घरेलू आपूर्ति
सरकार के सामने चीनी आयात पर मौजूदा 100 प्रतिशत शुल्क को कम करने या हटाने का विकल्प है। इससे विदेशी चीनी भारतीय बाज़ार में अपेक्षाकृत कम लागत पर पहुंच सकती है और घरेलू आपूर्ति बढ़ने से कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। खाद्य और वाणिज्य मंत्रालयों के प्रवक्ताओं की ओर से भी इस संबंध में तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। चीनी की खपत भारत में आम तौर पर अगस्त के अंत से जनवरी तक बढ़ जाती है। इस दौरान त्योहारों के साथ मिठाइयों, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की मांग बढ़ती है। इसलिए त्योहारी मांग बढ़ने से पहले घरेलू बाज़ार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
महाराष्ट्र में चीनी का भाव रिकॉर्ड स्तर पर
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में चीनी की एक्स-मिल कीमत हाल में करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने व्यापारियों के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा भी तय की है। इसका उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और बाज़ार में कृत्रिम कमी पैदा होने की आशंका को कम करना है।
दूसरी ओर, चीनी मिलों ने भी उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मिलें सामान्य समय से 10 से 15 दिन पहले गन्ने की पेराई शुरू करने की योजना बना रही हैं। आम तौर पर पेराई का नया सीज़न नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है। पहले पेराई शुरू होने से नई चीनी बाज़ार में जल्दी आ सकती है।
अल नीनो और कम बारिश से गन्ने की फसल पर नजर
चीनी की कीमतों को लेकर चिंता सिर्फ मौजूदा स्टॉक तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर भी अल नीनो के मजबूत होने की आशंका से चीनी की फसल प्रभावित होने की चिंता बढ़ी है। मौसम में बदलाव से गन्ने समेत कई फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है। भारत में भी गन्ने की फसल मानसून पर काफी निर्भर है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 14 अगस्त तक देश में गन्ने की बुवाई 58.3 लाख हेक्टेयर में हुई थी। यह पिछले साल की समान अवधि के स्तर से थोड़ा कम है।
ऐसे में सरकार के सामने एक तरफ घरेलू चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ किसानों और चीनी उद्योग के हितों को संतुलित रखना भी जरूरी है। आयात शुल्क में कटौती, मिलों में समय से पहले पेराई और स्टॉक सीमा जैसे कदमों के जरिए आने वाले त्योहारी सीज़न में चीनी की आपूर्ति और कीमतों को संभालने की कोशिश की जा रही है।