एक महीने में 17 प्रतिशत बढ़ी चीनी की क़ीमत, स्टॉक सीमा के बाद भी राहत नहीं, सरकार के अगले क़दम पर सबकी नज़र

Umang | Aug 05, 2026, 16:36 IST
पिछले 30 दिनों में देश में चीनी की थोक कीमतों में लगभग सत्रह प्रतिशत का उल्लेखनीय उछाल आया है। सरकार ने स्टॉक सीमाएं लागू की हैं, लेकिन फिर भी कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। चीनी मिलें उत्पादन घटाने और अल नीनो की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इस मूल्य वृद्धि के बावजूद मांग अब भी बरकरार है, जिससे लागत में गिरावट की संभावना निकट भविष्य में कम लगती है।
चीनी के बढ़ते दामों ने बढ़ाई चिंता

देश में चीनी की क़ीमतों में पिछले एक महीने के दौरान तेज़ उछाल देखने को मिला है। थोक बाज़ार में चीनी के दाम लगभग 17 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं के साथ-साथ खाद्य उद्योग पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। बढ़ती क़ीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में चीनी कारोबारियों पर स्टॉक सीमा लागू की थी, लेकिन इसके बावजूद बाज़ार में दाम ऊँचे बने हुए हैं। ऐसे में चीनी उद्योग को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही और कड़े कदम उठा सकती है।



चीनी मिलों का कहना है कि इस बार उत्पादन में कमी और अल नीनो के कारण अगले दो चीनी सत्रों में उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाज़ार में दबाव बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, क़ीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद चीनी की माँग में कोई कमी नहीं आई है। यही वजह है कि बाज़ार में दाम लगातार मज़बूत बने हुए हैं और निकट भविष्य में इनमें बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई दे रही है।



एक महीने में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

देशभर में चीनी की औसत थोक क़ीमत एक महीने पहले 3,960 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 4,620 रुपये प्रति क्विंटल पहुँच गई है। यानी एक महीने में क़रीब 16.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं पिछले एक सप्ताह में ही क़ीमतों में 4.3 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है। इस तेज़ बढ़ोतरी ने बाज़ार और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है।



स्टॉक सीमा लगाने के बाद भी नहीं थमे दाम

चीनी की बढ़ती क़ीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने 28 जुलाई से चीनी कारोबारियों पर स्टॉक सीमा लागू कर दी थी। इस फ़ैसले के बाद कुछ समय के लिए क़ीमतों में मामूली नरमी आई, लेकिन यह असर ज़्यादा समय तक नहीं टिक सका। इसके बाद फिर से दाम बढ़ने लगे। इससे पहले देश में घरेलू क़ीमतें कम होने और पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने के कारण 13 मई तक चीनी का निर्यात भी किया जा रहा था, लेकिन पिछले एक महीने में बाज़ार की स्थिति पूरी तरह बदल गई।



उत्पादन और अल नीनो की चिंता से बढ़ा दबाव

चीनी मिलों का कहना है कि इस वर्ष उत्पादन कम रहने और अल नीनो के कारण अगले दो चीनी सत्रों में गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। इसी वजह से बाज़ार में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं क़ीमतें बढ़ने के बावजूद चीनी की माँग सामान्य बनी हुई है, जिससे दामों को लगातार सहारा मिल रहा है। केंद्र सरकार हर महीने चीनी मिलों के लिए बिक्री कोटा तय करती है। अगस्त 2026 के लिए सरकार ने 22.5 लाख टन चीनी बिक्री का कोटा निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष के अगस्त महीने के बराबर है। इससे साफ़ है कि सरकार फ़िलहाल आपूर्ति बनाए रखते हुए बाज़ार की स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है।

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