सितंबर से हर 15 दिन में मिलेगा चीनी बिक्री कोटा, मिलों को पहले हफ़्ते में बेचनी होगी 40% मात्रा
केंद्र सरकार ने घरेलू बाज़ार में चीनी की बिक्री व्यवस्था में बदलाव करते हुए सितंबर से मिलों के लिए बिक्री कोटा हर 15 दिन में जारी करने का फ़ैसला किया है। अभी मिलों को मासिक कोटा दिया जाता है। नई व्यवस्था के तहत हर मिल को 15 दिन के लिए आवंटित मात्रा का कम से कम 40 प्रतिशत पहले सप्ताह में बेचना होगा, जबकि बची हुई मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी। सरकार ने यह कदम चीनी की बढ़ती क़ीमतों पर क़ाबू पाने और बाज़ार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया है। देश के कई खुदरा बाज़ारों में चीनी की क़ीमत हाल में 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुँच गई थी।
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक़, 1 अगस्त से चीनी मिलों में भंडार के भौतिक सत्यापन के लिए चलाए गए देशव्यापी अभियान में चीनी की उपलब्धता आरामदायक स्थिति में पाई गई है। मंत्रालय ने कुछ मिलों पर शॉर्ट सेलिंग यानी हाथ में उपलब्ध स्टॉक से कम मात्रा बेचने का आरोप भी लगाया है। सरकार का कहना है कि हर 15 दिन में कोटा जारी करने से मांग और आपूर्ति पर नज़दीकी नज़र रखने, बाज़ार की स्थिति में बदलाव के अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया देने और कृत्रिम रूप से आपूर्ति सीमित किए जाने से रोकने में मदद मिलेगी। ज़रूरत पड़ने पर घरेलू बाज़ार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कोटा भी जारी किया जा सकेगा।
हर 15 दिन में मिलेगा बिक्री कोटा
सरकार ने मौजूदा मासिक कोटा व्यवस्था को बदलकर सितंबर से पखवाड़े के आधार पर कोटा जारी करने का निर्णय लिया है। हर मिल को 15 दिन के लिए तय की गई मात्रा में से कम से कम 40 प्रतिशत चीनी पहले सप्ताह में बेचनी होगी। बची हुई मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, कुछ मामलों में महीने की शुरुआत में मिलों द्वारा बेची गई चीनी को ख़रीदार महीने के आख़िर में उठाते थे। इससे बाज़ार में कृत्रिम कमी की स्थिति बनती थी। नई व्यवस्था के ज़रिए चीनी को समय पर बाज़ार तक पहुँचाने की कोशिश की जाएगी। मंत्रालय ने कहा कि नई व्यवस्था से सरकार को मांग और आपूर्ति की निगरानी करने, बाज़ार में बदलाव के अनुसार तेज़ी से निर्णय लेने और आपूर्ति को कृत्रिम रूप से सीमित होने से रोकने में मदद मिलेगी।
मिलों और कारोबारियों पर बढ़ी निगरानी
खाद्य मंत्रालय ने 24 अगस्त को सभी चीनी मिलों से कहा था कि वे ऐसे थोक कारोबारियों को चीनी नहीं बेच सकते, जिन्होंने स्टॉक लिमिट आदेश के तहत निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है। अब तक 5,045 कारोबारी ही पंजीकृत हुए हैं। चीनी कारोबार से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नियमन करना अच्छा है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा नियमन ठीक नहीं है। उनके मुताबिक़, सीमित संख्या में कारोबारियों को मिलों से चीनी खरीदने की अनुमति देने से कारोबार कुछ हाथों में केंद्रित होने का जोखिम है, ख़ासकर ऐसे समय में जब घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने चीनी आयात की अनुमति दी है।
मंत्रालय ने कहा कि सरकार पिछले कुछ समय से चीनी की क़ीमत, स्टॉक और देशभर में इसकी आवाजाही पर लगातार नज़र रख रही है। मिलों को बिक्री की तारीख़ से सात दिन के भीतर चीनी भेजना अनिवार्य किया गया है। थोक उपभोक्ताओं से भी कहा गया है कि वे अपनी परिचालन ज़रूरत से अधिक स्टॉक जमा न करें। इसके अलावा एडवांस ऑथराइज़ेशन स्कीम के तहत रिफ़ाइनरियों को आयातित चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। कारोबारियों और प्रोसेसरों के लिए किसी भी समय 400 टन की स्टॉक लिमिट भी तय की गई है। मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में एक्स-मिल चीनी की क़ीमतों में क़रीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई है और खुदरा क़ीमतें भी नीचे आने लगी हैं। 27 अगस्त से खुदरा क़ीमतों में गिरावट शुरू होने की बात मंत्रालय ने कही है।
अक्टूबर से बढ़ेगी चीनी की नई आपूर्ति
खाद्य मंत्रालय ने कहा कि देश में पर्याप्त भौतिक स्टॉक होने के बावजूद हाल में चीनी की क़ीमतों में तेज़ बढ़ोतरी मुख्य रूप से जमाखोरी और सट्टेबाज़ी के कारण हुई। सरकार के मुताबिक़, कई मामलों में चीनी मिलों के पास उनके द्वारा सरकार को दी गई मासिक रिटर्न में घोषित मात्रा से अधिक स्टॉक पाया गया। कुछ मिलों पर शॉर्ट सेलिंग का भी आरोप लगा। इसका मतलब है कि मिलों ने उन्हें दिए गए मासिक कोटे के मुक़ाबले कम चीनी बेची। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी गतिविधियों से पर्याप्त भौतिक स्टॉक मौजूद होने के बावजूद बाज़ार में आपूर्ति अनावश्यक रूप से सीमित होती है। सरकार का कहना है कि हर 15 दिन में कोटा जारी करने की व्यवस्था से चीनी की आपूर्ति को वास्तविक घरेलू मांग के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिलेगी।
नए चीनी सीज़न 2026-27 के लिए गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर में 10 लाख टन से अधिक और नवंबर में 45 लाख टन चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है। अक्टूबर में उत्पादित चीनी को मिलों द्वारा बिना किसी प्रतिबंध के बेचने की अनुमति देने से घरेलू खपत के लिए अतिरिक्त आपूर्ति में काफ़ी बढ़ोतरी होगी। इस बीच, उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव शुगर मिल्स फेडरेशन ने अपने सभी सदस्यों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि 21 अगस्त को बेची गई चीनी को ख़रीदार 31 अगस्त तक उठा लें, क्योंकि उस मात्रा का कुछ हिस्सा अभी तक ख़रीदारों ने नहीं उठाया है।