अल नीनो के खतरे के बीच चीनी उद्योग पर बढ़ा दबाव, गन्ने का रकबा ठहरा; कई साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है भंडार
देश में चीनी की मिठास बरकरार रखने की चुनौती अगले सीजन में और बढ़ सकती है। एक तरफ गन्ने का रकबा लगभग ठहराव की स्थिति में है, वहीं दूसरी ओर एल नीनो की आशंका और सामान्य से कमजोर मानसून के पूर्वानुमान ने चीनी उद्योग की चिंताएं बढ़ा दी हैं।देश में गन्ने का रकबा 2026-27 सीजन में लगभग स्थिर रहने की उम्मीद है, लेकिन एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बीच चीनी क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ती जा रही है। एक ओर गन्ने का रकबा पिछले वर्ष के स्तर पर बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर चीनी का समापन भंडार (क्लोजिंग स्टॉक) कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सरकार पर घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने का दबाव बढ़ सकता है।
उद्योग और राज्यों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार जून के पहले सप्ताह तक देश में 54.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई हो चुकी थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 54.3 लाख हेक्टेयर था। अनुमान है कि पूरे सीजन में गन्ने का कुल रकबा लगभग 58.5 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर रहेगा।
उत्तर प्रदेश सबसे आगे, महाराष्ट्र में मामूली बढ़ोतरी
गन्ना उत्पादन में अग्रणी उत्तर प्रदेश में करीब 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष के बराबर है। महाराष्ट्र में रकबा बढ़कर 11.8 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि कर्नाटक में यह मामूली घटकर 4.3 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि रकबे में स्थिरता के बावजूद उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि कई क्षेत्रों में फसल की पैदावार मानसून पर निर्भर करती है।
मांग बढ़ी, लेकिन उत्पादन दबाव में
केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए गन्ना उत्पादन का लक्ष्य 50 करोड़ टन बनाए रखा है। इसके बावजूद चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। घरेलू मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और चीनी की खपत आपूर्ति से आगे निकलती दिख रही है। सरकार ने चालू सीजन के पहले छह महीनों के लिए घरेलू बिक्री हेतु 1.33 करोड़ टन चीनी आवंटित की थी, लेकिन चीनी मिलों के आंकड़े बताते हैं कि वास्तविक बिक्री 1.44 करोड़ टन तक पहुंच गई। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि पूरे सीजन में चीनी की खपत 2.85 से 2.90 करोड़ टन के बीच रह सकती है।
कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच सकता है भंडार
रिपोर्ट्स के अनुसार 2025-26 सीजन में शुद्ध चीनी उत्पादन 2.8 करोड़ टन से कम रहने का अनुमान है। इसके चलते अगले सीजन की शुरुआत में 30 सितंबर तक उपलब्ध शुरुआती भंडार घटकर 35 से 39 लाख टन के बीच रह सकता है। पिछले वर्ष यह भंडार करीब 49 लाख टन था। विशेषज्ञों का कहना है कि घटते भंडार और स्थिर गन्ना रकबे की स्थिति में सरकार के पास नीतिगत ढील देने की गुंजाइश बहुत कम रह जाएगी।
कमजोर मानसून से बढ़ सकती है चुनौती
पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश तथा बिहार के कई हिस्सों में गन्ने की पैदावार काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि मानसून कमजोर रहता है तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है। अल नीनो की आशंकाओं और सामान्य से कम वर्षा के पूर्वानुमान ने उद्योग की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
निर्यात और एथेनॉल के लिए कम बचेगा अतिरिक्त स्टॉक
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घटते भंडार के कारण सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को प्राथमिकता दे सकती है। इसका असर चीनी निर्यात और एथेनॉल उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है। हाल ही में सरकार ने चीनी निर्यात के लिए निर्धारित 16 लाख टन के कोटे में से 8 लाख टन से कम निर्यात होने के बाद निर्यात खिड़की बंद कर दी थी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार घरेलू जरूरतों को लेकर सतर्क रुख अपना रही है।
एथेनॉल उत्पादन के लिए भी बढ़ सकती है चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक अगले सीजन में एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन 30 लाख टन से कम रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती भंडार कम रहता है और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं होती, तो एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और निर्यात दोनों के लिए पर्याप्त अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आगामी सीजन में चीनी उद्योग की दिशा काफी हद तक मानसून की स्थिति, गन्ने की पैदावार और घरेलू मांग पर निर्भर करेगी।