1950 के बाद सबसे शक्तिशाली सुपर अल नीनो की आहट! रिकॉर्ड स्तर पर समुद्र का तापमान, ऑस्ट्रेलियाई मौसम एजेंसी का दावा

Umang | Jul 01, 2026, 16:54 IST
ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी ब्यूरो ऑफ़ मेटियोरोलॉजी ने चेतावनी दी है कि 2026 में 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली सुपर अल नीनो विकसित हो सकता है। प्रशांत महासागर का तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है और वायुमंडलीय परिस्थितियाँ इसे और मज़बूत बना रही हैं। साथ ही, वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जिससे दुनिया भर में भीषण गर्मी, बाढ़, समुद्री हीटवेव और चरम मौसमी घटनाओं का ख़तरा बढ़ सकता है।

दुनिया एक बार फिर बेहद शक्तिशाली अल नीनो की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। ऑस्ट्रेलिया की सरकारी मौसम एजेंसी ब्यूरो ऑफ़ मेटियोरोलॉजी (BoM) ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में तेज़ी से बढ़ रही गर्मी और उससे जुड़ी वायुमंडलीय परिस्थितियाँ एक ‘सुपर अल नीनो’ का रूप ले सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह 1950 के बाद के सबसे शक्तिशाली एल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। इसका असर दुनिया भर में मौसम, वर्षा, तापमान, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और चरम मौसमी घटनाओं के रूप में देखने को मिल सकता है।



ब्यूरो ऑफ़ मेटियोरोलॉजी की एक रिपोर्ट के अनुसार, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान अल नीनो की सीमा से काफ़ी ऊपर पहुँच चुका है और महासागर तथा वायुमंडल एक-दूसरे को मज़बूत करते हुए इस स्थिति को और तीव्र बना रहे हैं। सभी प्रमुख वैश्विक जलवायु मॉडल आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर के लगातार और अधिक गर्म होने का अनुमान लगा रहे हैं। ऐसे संकेत हैं कि यह स्थिति कम-से-कम इस साल के अंत तक बनी रह सकती है।



अल नीनो की स्थिति अब पूरी तरह विकसित

ऑस्ट्रेलियाई मौसम एजेंसी के अनुसार, निनो 3.4 इंडेक्स 28 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में +1.24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अल नीनो घोषित होने की सीमा +0.80 डिग्री सेल्सियस होती है। पिछले दो सप्ताह में इसमें लगभग 0.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान अल नीनो की सीमा से ऊपर है और वायुमंडलीय संकेतक भी एल नीनो की स्थिति की पुष्टि कर रहे हैं। महासागर और वायुमंडल के बीच बढ़ता तालमेल इस स्थिति को कम-से-कम वर्ष के अंत तक बनाए रख सकता है।



रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में व्यापारिक हवाएँ सामान्य से कमज़ोर हो गई हैं या कई हिस्सों में उलटी दिशा में बह रही हैं। वहीं, सदर्न ऑस्सिलेशन इंडेक्स (SOI) 27 जून को -25.2 दर्ज किया गया, जो मज़बूत अल नीनो की ओर इशारा करता है। अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा (डेट लाइन) के आसपास बादलों की सक्रियता भी बढ़ी है।



हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) फ़िलहाल तटस्थ

फ़िलहाल हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) तटस्थ स्थिति में है और इसका सूचकांक -0.02 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। हालाँकि, अधिकांश जलवायु मॉडल दक्षिणी गोलार्ध की सर्दियों और वसंत के दौरान सकारात्मक IOD बनने की संभावना जता रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सकारात्मक IOD भारत में अधिक नमी ला सकता है और एल नीनो वाले वर्षों में भी मानसूनी वर्षा को सहारा दे सकता है।



रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के समुद्रों की सतह का तापमान लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है। मई 2026 वैश्विक समुद्री सतह तापमान के लिहाज़ से 1900 के बाद का सबसे गर्म मई रहा। वहीं, कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) और कोपरनिकस मरीन सर्विस (CMEMS) ने भी पुष्टि की है कि 21 जून 2026 को वैश्विक समुद्री सतह तापमान 20.86 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जो 2023 और 2024 के इसी समय के रिकॉर्ड से भी अधिक है।



रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र का बढ़ता तापमान वातावरण को अधिक समय तक गर्म बनाए रखता है, तूफ़ानों को अतिरिक्त ऊर्जा देता है और वाष्पीकरण बढ़ाता है। इससे कई क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा, बाढ़ और चरम मौसम की घटनाओं का ख़तरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, समुद्री तापमान में वृद्धि से समुद्री हीटवेव अधिक बार और अधिक तीव्र हो सकती हैं। इसका असर समुद्री जैव विविधता, मत्स्य संसाधनों और तटीय अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने के साथ-साथ तटीय इलाक़ों में गर्मी की तीव्रता भी बढ़ सकती है।

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