West Bengal Voter List: वोटर लिस्ट से क्यों कट रहे हैं नाम? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से माँगी रिपोर्ट, क्या योग्य मतदाता वोट दे पाएंगे?

Gaon Connection | Apr 20, 2026, 14:54 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि वह आज ही कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगेगी। मामला उन अपीलीय न्यायाधिकरणों से जुड़ा है, जिन्हें वोटर लिस्ट से नाम हटने पर शिकायत सुनने के लिए बनाया गया था।
रहीम अंसारी और उसका परिवार

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम कटने का मामला अब और गंभीर हो गया है। नक्सलबाड़ी के शेबताला गाँव समेत कई इलाकों से लोगों ने शिकायत दर्ज़ कराई थी कि पूरे दस्तावेज होने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। कुछ लोगों ने यह भी कहा था कि “6 से ज्यादा भाई-बहन” जैसी वजह बताकर नाम काटा गया। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है।



गाँव वालों ने क्या कहा?

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गाँव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट में कई ग्रामीणों ने कहा था कि परिवार के कुछ सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट में है, लेकिन कुछ का नाम हटा दिया गया। लोगों का कहना था कि आधार कार्ड, राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र जैसे कागज जमा करने के बाद भी नाम नहीं जोड़ा गया। कुछ लोगों को हटाने का स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया।



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अब क्या हुआ नया अपडेट?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े अपीलीय न्यायाधिकरणों के काम न करने की शिकायतों पर वह कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगेगा। अदालत के सामने आरोप रखा गया कि ट्रिब्यूनल सही तरह से काम नहीं कर रहे और सिर्फ ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और तुरंत रिपोर्ट तलब करने की बात कही।



चुनाव आयोग को क्या निर्देश मिले?

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सुप्रीम कोर्ट ने पहले चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि जिन लोगों की अपील ट्रिब्यूनल स्वीकार करे, उनके नाम पूरक संशोधित वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएँ। यानी अगर किसी का नाम गलत तरीके से कटा है और अपील मंजूर होती है, तो उसे फिर से वोट देने का अधिकार मिल सकता है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। हालांकि, अदालत ने साफ कहा था कि सिर्फ अपील लंबित रहने से किसी व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं मिल जाएगा।



13 अप्रैल के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि जहाँ 21 अप्रैल या 27 अप्रैल 2026 तक अपीलों का निपटारा हो जाए, वहाँ आदेश लागू करते हुए नई पूरक वोटर लिस्ट जारी की जाए। इससे पहले, वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ 13 लोगों के समूह ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन अदालत ने इसे समय से पहले दायर याचिका बताते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया था और कहा था कि पहले अपीलीय न्यायाधिकरणों का रुख किया जाए।



SIR से जुड़ा है पूरा मामला

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यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की समीक्षा यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा है। इस प्रक्रिया में कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। प्रभावित लोगों को अपील का मौका दिया गया, लेकिन आरोप है कि न्यायाधिकरण सही तरीके से काम नहीं कर रहे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए कहा है कि वह तुरंत रिपोर्ट लेकर स्थिति स्पष्ट करेगा। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी योग्य मतदाता के साथ अन्याय न हो।



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गाँव के लोगों को क्या राहत मिल सकती है?

अगर ट्रिब्यूनल तेजी से सुनवाई करते हैं, तो जिन ग्रामीणों ने अपील की है उन्हें राहत मिल सकती है। इससे उन लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़ सकते हैं, जिनके दस्तावेज पूरे हैं और नाम गलत तरीके से हटे हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में वोटर लिस्ट से नाम हटना बड़ा राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बन गया है। गाँवों में लोग चाहते हैं कि बिना वजह किसी का वोट न कटे और सभी पात्र मतदाता मतदान कर सकें। शेबताला गाँव जैसे इलाकों से उठी शिकायत अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब नजर इस बात पर है कि ट्रिब्यूनल कितनी जल्दी सुनवाई करते हैं और कितने लोगों को राहत मिलती है।

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