जम्मू कश्मीर में इंटरनेट पाबंदी पर बोला सुप्रीम कोर्ट- 'इंटरनेट नागरिकों का मौलिक अधिकार'

गाँव कनेक्शन | Jan 10, 2020, 07:51 IST
Share
कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट बैन और धारा 144 को किसी क्षेत्र पर लंबे समय तक लागू नहीं किया जा सकता।
#SupreamCourt
जम्मू कश्मीर में इंटरनेट पाबंदी पर बोला सुप्रीम कोर्ट- ‘इंटरनेट नागरिकों का मौलिक अधिकार’
जम्मू कश्मीर में 5 महीने से अधिक समय तक लगे इंटरनेट पाबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट नागरिकों का मौलिक अधिकार है और यह व्यवस्था जल्द से जल्द बहाल होनी चाहिए। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य जरुरी जगहों पर इंटरनेट व्यवस्था जल्द से जल्द बहाल करने का आदेश दिया है और इन पाबंदियों की सात दिन में समीक्षा रिपोर्ट मांगी है।

राज्य में लगाए गए इंटरनेट पर पाबंदी और अन्य प्रतिबंधों के खिलाफ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन और कुछ अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली थी। इस पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट का अधिकार, अभिव्यक्ति के अधिकार 19(1) के अन्तर्गत आता है जो कि एक मौलिक अधिकार हैं। इस मामले में सुनवाई 27 नवंबर, 2019 को पूरी हुई थी और जस्टिस एन. वी. रमण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस बी. आर. गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उन सभी आदेशों को सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया है, जिनके तहत इन प्रतिबंधों को लगाया गया था। कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध के जितने भी आदेश दिए गए थे उसे सरकार ने ना सार्वजनिक किया और ना ही उसे कोर्ट के सामने रखा। कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार आगे कोई भी आदेश जारी करे तो उसे सार्वजनिक करे। लोग ऐसे आदेशों को चुनौती भी दे सकते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासन कश्मीर में बार-बार धारा 144 लगाए जाने के आदेशों को भी सार्वजनिक करे। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी राज्य या क्षेत्र पर बार-बार धारा 144 थोपा जाना उचित नहीं है। यह सत्ता के दुरुपयोग का प्रतीक है। कोर्ट ने इस मामले में भी सरकार से समीक्षा रिपोर्ट फाइल करने और उसे सार्वजनिक करने की बात कही है।

कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर पाबंदी सीमित समय के लिए लगाई जा सकती है, लेकिन इसे लंबे समय तक एक पूरे क्षेत्र पर थोपना न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। इसके बाद कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर सभी प्रतिबंधों की समीक्षा कर उस पर रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया।

फैसला सुनाने के दौरान तीन सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि कश्मीर ने काफी हिंसा देखी है। इसलिए वहां पर सुरक्षा मानकों के साथ-साथ मानवाधिकारों और आजादी को संतुलित करने की जरुरत है। इससे पहले केंद्र सरकार ने इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य में लगे प्रतिबंधों को सही ठहराया था। केन्द्र ने कोर्ट में कहा था कि एहतियाती उपायों के तहत ये कदम उठाए गए हैं। अगर सरकार नागरिकों की सुरक्षा के लिए ये कदम नहीं उठाती तो मुर्खता होती।

हाल ही में आए एक रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट पर पाबंदी लगाने के मामले में भारत दुनिया के बाकी देशों से काफी आगे है। 2019 में भारत में इंटरनेट पाबंदी के 100 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो कि विश्व में सबसे अधिक है।

सॉफ्टवेयर और लॉ के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (एसएलएफसी) की 'लिविंग इन डिजिटल डार्कनेस' नाम की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में भी इंटरनेट सेवा बंद करने के मामले में भारत अव्वल था। तब नेटबंदी के कुल 134 मामले सामने आए थे।

यह भी पढ़ें- इंटरनेट पर रोक लगाने में भारत दुनिया में सबसे आगे: रिपोर्ट




Tags:
  • SupreamCourt
  • jammu kashmir
  • internet ban
  • story