नीलेश मिसरा की अगली फिल्म 'The Last Batsman' का पोस्टर रिलीज़, देखें पहली झलक

Umang | Jun 17, 2026, 18:19 IST
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मशहूर लेखक, गीतकार और कहानीकार नीलेश मिसरा की नई फिल्म 'द लास्ट बैट्समैन' का पोस्टर रिलीज़ हो गया है। रीतम नंदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक पिता और बेटे के रिश्ते और धुंधली पड़ती यादों की भावनात्मक कहानी को पर्दे पर लाएगी। फिल्म में वरिष्ठ अभिनेता अनिल रस्तोगी, नीलेश मिसरा समेत कई कलाकार नज़र आएंगे। इससे पहले नीलेश मिसरा की मिनी फीचर फिल्म 'कूद' चर्चा में रही थी।

मशहूर लेखक, गीतकार, पत्रकार और कहानीकार नीलेश मिसरा की अगली फिल्म 'द लास्ट बैट्समैन' (The Last Batsman) का पोस्टर रिलीज़ हो गया है। नीलेश मिसरा ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से फिल्म के पोस्टर की पहली झलक फैंस के साथ साझा की है। इस फिल्म के निर्देशक रीतम नंदी हैं। नीलेश मिसरा ने पोस्टर शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "स्लो मोशन पिक्चर्स की तरफ़ से हमारी अगली फिल्म की पहली झलक। क्या यादें तब भी वजूद में रहेंगी अगर हम उन्हें भूल जाएं? नीलेश मिसरा पेश करते हैं 'द लास्ट बैट्समैन'- लेखक और निर्देशक रीतम नंदी, और निर्माता यामिनी मिसरा। यह कहानी है एक पिता, एक बेटे और उन यादों की जो समय बीत जाने के बाद भी लंबे समय तक हमें संवारती हैं। जल्द ही आपकी स्क्रीन पर आ रही है।" इससे पहले इसी साल अप्रैल में उनकी पहली मिनी फ़ीचर फिल्म 'कूद' रिलीज़ हुई थी।



पोस्टर रिलीज़ होने के साथ ही फिल्म की स्टार कास्ट और इसके मुख्य किरदारों को लेकर भी उत्सुकता बढ़ गई है। आइए जानते हैं कि 'द लास्ट बैट्समैन' में कौन-कौन से कलाकार नज़र आएंगे।



फिल्म में ये कलाकार आएंगे नज़र

पोस्टर रिलीज़ होने के साथ ही फिल्म की स्टार कास्ट से भी पर्दा उठ गया है। 'द लास्ट बैट्समैन' में वरिष्ठ अभिनेता अनिल रस्तोगी के साथ लेखक और कहानीकार नीलेश मिसरा भी अभिनय करते दिखाई देंगे। इसके अलावा संदीप यादव, मनीषा मेहरा, प्रीति चौहान, वैदेही मिसरा, अंशिका दीक्षित और मनीष मिश्रा भी महत्वपूर्ण किरदार निभाते नज़र आएंगे। पोस्टर जारी होने के बाद दर्शकों के बीच फिल्म की कहानी और कलाकारों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।




'कम्यूट फिल्म' की नई विधा

नीलेश मिसरा ने 'कूद' के साथ 'कम्यूट फिल्म' नाम की एक नई विधा भी पेश की है। ये ऐसी फ़िल्में हैं जिन्हें रोज़ाना आने-जाने के दौरान, जैसे मेट्रो, बस या टैक्सी में पूरा देखा जा सकता है। इनकी अवधि भारतीय लोगों के औसतन 50 मिनट के आने-जाने के समय को ध्यान में रखकर तय की गई है। 'कूद' इस नई सोच का एक शुरुआती उदाहरण है।




नीलेश मिसरा का फिल्मी करियर

नीलेश मिसरा का फिल्मी सफ़र 2003 में फिल्म 'जिस्म' के गानों 'जादू है नशा है' और 'चलो तुमको लेकर चलें' से शुरू हुआ। इन गानों में उन्होंने सीधेपन की बजाय माहौल और इशारों से संवेदनशीलता दिखाई। 2005 में फिल्म 'रोग' के लिए उन्होंने 'मैंने दिल से कहा', 'खूबसूरत है वो इतना' और 'गुज़र न जाए' जैसे गानों से दिल को छू लेने वाली कहानियाँ कही, जिनमें बिछड़ने, यादों और दिल के टूटने जैसे गहरे एहसास थे।



2006 से 2011 के बीच, नीलेश मिसरा ने साबित किया कि पॉपुलर संगीत में भी भावनात्मक गहराई हो सकती है। फिल्म 'वो लम्हे' (2006) का गाना 'क्या मुझे प्यार है' प्यार को अधिकार की बजाय अनिश्चितता के रूप में दिखाने के लिए बहुत मशहूर हुआ। 2006 में ही उन्होंने 'गैंगस्टर' के गाने 'लम्हा लम्हा' और 'हॉलिडे' के गानों में भटकने, बेचैनी और तड़प के भावों को दिखाया। उन्होंने 'फाइट क्लब: मेंबर्स ओनली' (2006) के गाने 'बोलो ना तुम ज़रा' जैसे गानों से रोमांस और सोच को भी जोड़ा।



  • गीतकार के तौर पर नीलेश मिसरा ने अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम किया। 2009 में फिल्म 'सिकंदर' के लिए उन्होंने फैज़ अहमद फैज़ की नज़्म 'गुलों में रंग भरे' को एक नए अंदाज़ में पेश किया। उन्होंने 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई' (2010) और 'अंजाना अंजानी' (2010) जैसी फिल्मों के लिए भी गाने लिखे।
    2011 तक उनके गाने पूरे भारत में बहुत पसंद किए जाने लगे। 'दिल तो बच्चा है जी', 'रेडी' और 'बॉडीगार्ड' जैसी फिल्मों के गानों में उन्होंने आसानी से समझ आने वाले शब्दों के साथ सच्ची भावनाएँ पिरोईं।
  • 2012 से 2015 तक, बड़ी कमर्शियल फिल्मों में भी नीलेश मिसरा के गानों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहा। 'एजेंट विनोद' का 'दिल मेरा मुफ़्त का', 'शंघाई' का 'खुदाया' और 'एक था टाइगर' का 'बंजारा' जैसे गानों में बिछड़ने और बेघर होने के एहसास थे। 2012 में आई फिल्म 'बर्फी!' का गाना 'क्यों' मुख्यधारा के संगीत में एक दुर्लभ दार्शनिक सोच का उदाहरण था।
  • 2013 में फिल्म 'चश्मे बद्दूर' के गानों 'डिचक्याऊं ढूम ढूम' और 'इश्क मोहल्ला' में उनके लेखन का अंदाज़ बदला। इसके बाद उन्होंने 'शूटआउट एट वडाला' (2013), 'आई, मी और मैं' (2013) और 'बजरंगी भाईजान' (2015) जैसी फिल्मों के लिए दमदार और किरदारों पर आधारित लेखन किया। 'बजरंगी भाईजान' का गाना 'ज़िंदगी (रिप्राइज़)' एक बड़े भावनात्मक सफर में ठहराव का एहसास देता था, जो उनकी बड़ी कहानियों में भी शांति लाने की क्षमता दिखाता है।
  • जैसे-जैसे हिंदी सिनेमा बदला, नीलेश मिसरा के गानों ने भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी। फिल्म 'जग्गा जासूस' (2017) के उनके गाने चंचल, पुरानी यादों वाले और शब्दों से भरपूर थे। 2021 में फिल्म 'पगलैट' के गानों 'फिरे फक़ीरा' और 'थोड़े कम अजनबी' से उन्होंने फिर से अंदरूनी भावनाओं को छुआ।
    उनके हालिया काम में 'मेट्रो... इन दिनों' (2025) के गाने शामिल हैं। ये गाने प्यार, दुख, दूरी, स्वीकार्यता और सच्ची भावनाओं को दर्शाते हैं, जिनमें जल्दबाजी की बजाय ठहराव है।
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