अगस्त में धान की फसल पर बड़ा ख़तरा! इन कीट और रोगों से हो सकता है भारी नुकसान, किसान तुरंत अपनाएँ ये उपाय

Umang | Aug 06, 2026, 18:05 IST
बिहार कृषि विभाग ने धान की फसल को कीटों और रोगों से बचाने के लिए किसानों को सलाह दी है। तना छेदक और हिस्पा जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप और कीटनाशकों का प्रयोग सुझाया गया है। बैक्टीरियल लीफ़ ब्लाइट और लीफ़ स्ट्रिक रोगों के लिए खेत से पानी निकालना और निगरानी रखना आवश्यक है।
कृषि विभाग ने किसानों के लिए जारी की ज़रूरी चेतावनी

बिहार सरकार के कृषि विभाग ने अगस्त माह में धान की फसल को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखने के लिए किसानों के लिए विस्तृत सलाह जारी की है। विभाग ने कहा है कि इस समय धान की फसल में तना छेदक, हिस्पा, बैक्टीरियल लीफ़ ब्लाइट और लीफ़ स्ट्रिक जैसे रोग एवं कीट तेज़ी से फैल सकते हैं। यदि समय रहते इनकी पहचान कर वैज्ञानिक तरीक़े से नियंत्रण नहीं किया गया, तो फसल की वृद्धि और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।



कृषि विभाग ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अनुशंसित दवाओं का प्रयोग करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि सही समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण अपनाने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। साथ ही किसानों को केवल आवश्यकता होने पर ही रासायनिक नियंत्रण अपनाने और निर्धारित मात्रा में ही दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी गई है।



तना छेदक (स्टेम बोरर) दिखे तो तुरंत करें नियंत्रण

कृषि विभाग के अनुसार, धान की फसल में तना छेदक (स्टेम बोरर) के नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। यदि खेत में कीट का प्रकोप दिखाई दे, तो फ्लूबेन्डियामाइड 75 प्रतिशत एससी का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पूरी फसल पर समान रूप से छिड़काव करें।



हिस्पा कीट के लिए निर्धारित मात्रा में करें छिड़काव

धान की फसल में हिस्पा (लीफ़ फोल्डर) के नियंत्रण के लिए विभाग ने थायामेथोक्साम 10 प्रतिशत + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 20 प्रतिशत ज़ेडसी का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल तैयार कर फसल पर छिड़काव करने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि दवा का प्रयोग अनुशंसित मात्रा में ही किया जाए, ताकि कीट का प्रभावी नियंत्रण हो सके।



बैक्टीरियल लीफ़ ब्लाइट और लीफ़ स्ट्रिक पर रखें विशेष नज़र

कृषि विभाग ने किसानों को बैक्टीरियल लीफ़ ब्लाइट और लीफ़ स्ट्रिक रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सतर्क रहने को कहा है। विभाग के अनुसार, खेत से पहले पानी निकाल देना चाहिए और ब्रोज़निंग (रोग का प्रसार) रुकने तथा फसल के स्वस्थ होने तक लगातार निगरानी बनाए रखनी चाहिए।




आवश्यकता होने पर ही अपनाएँ रासायनिक नियंत्रण

यदि रोग का प्रकोप अधिक हो जाए, तो कृषि विभाग ने रासायनिक नियंत्रण की भी सलाह दी है। इसके लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 50 ग्राम तथा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी का 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर फसल पर समान रूप से छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।



कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों का नियमित निरीक्षण करें, रोग या कीट के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और आवश्यकता पड़ने पर नज़दीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें। अधिक जानकारी और तकनीकी सलाह के लिए किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 (सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक) पर संपर्क कर सकते हैं।

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