तीन तरफा संकट में फंसी खेती! कमजोर मानसून, अल नीनो और वेस्ट एशिया युद्ध से कृषि पर बड़ा खतरा: ICRA
भारत का कृषि क्षेत्र आने वाले समय में गंभीर चुनौतियों का सामना कर सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून, अल नीनो की आशंका और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव—ये तीनों मिलकर कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकते हैं।
मानसून कमजोर रहने का अनुमान
India Meteorological Department के 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहले दीर्घकालिक पूर्वानुमान (LRF) में बारिश 92% (±5%) लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम है। ICRA ने इसे पिछले 25 वर्षों में सबसे कमजोर शुरुआती अनुमान बताया है। इसके विपरीत, 2024 और 2025 में मानसून 108% LPA के साथ सामान्य से बेहतर रहा था। कमजोर मानसून का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ सकता है, जो जून से सितंबर तक बारिश पर निर्भर होती हैं। ICRA के मुताबिक, कम बारिश से बुआई घट सकती है, जिससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही, जलाशयों में पानी भरने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
अल नीनो का खतरा बढ़ा
रिपोर्ट में अल नीनो के खतरे को भी बड़ा कारक बताया गया है। वैश्विक मौसम एजेंसियों के अनुसार जून से अगस्त 2026 के बीच एल नीनो बनने की 62% संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करती है और फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर डालती है।
उर्वरकों की आपूर्ति भी प्रभावित
इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उर्वरकों की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। सप्लाई चेन में रुकावट आने से कच्चे माल और तैयार उर्वरकों की उपलब्धता घट सकती है, जिससे किसानों के लिए लागत बढ़ने और उत्पादन पर असर पड़ने का खतरा है। ICRA ने FY2027 के लिए कृषि क्षेत्र की सकल मूल्य वर्धन (GVA) वृद्धि दर 3% रहने का अनुमान जताया है, लेकिन इसमें गिरावट का जोखिम भी बताया है। साथ ही, खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के चलते खुदरा महंगाई (CPI) 4.5% से ऊपर जा सकती है।हालांकि, कुछ राहत जलाशयों के बेहतर स्तर से मिल रही है।
जल भंडार से थोड़ी राहत
2 अप्रैल 2026 तक देश के जलाशयों में 47% जल भंडारण था, जो पिछले साल (40%) और 10 साल के औसत (37%) से ज्यादा है। इससे कमजोर मानसून के असर को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में उचित बढ़ोतरी किसानों के भरोसे को बनाए रखने के लिए जरूरी होगी। साथ ही, अगर मानसून का वितरण संतुलित रहा, तो कम बारिश के बावजूद नुकसान को सीमित किया जा सकता है।