गुजरात के ऊंझा जीरा और सौंफ को मिला GI टैग, किसानों को 20-30% अधिक दाम मिलने की उम्मीद, निर्यात को मिलेगी नई रफ़्तार

Gaon Connection | Jul 14, 2026, 13:16 IST
गुजरात के प्रसिद्ध ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल गया है। इससे इन मसालों को कानूनी पहचान मिलने के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के अनुसार, जीआई टैग वाले उत्पाद 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ने और गुजरात की मसाला विरासत को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद है।

भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। क्षेत्र विशेष की गुणवत्ता और पहचान वाले उत्पादों को कानूनी संरक्षण देने वाली जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) व्यवस्था के तहत अब गुजरात के प्रसिद्ध ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को भी जीआई टैग प्रदान किया गया है। इससे इन मसालों की पहचान और बाज़ार में विश्वसनीयता दोनों मज़बूत होने की उम्मीद है।



जीआई टैग मिलने के बाद इन दोनों मसालों को उत्तर गुजरात के ऊंझा क्षेत्र की विशिष्ट उपज के रूप में आधिकारिक मान्यता मिल गई है। सरकार का मानना है कि इस मान्यता से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में इनकी ब्रांडिंग को बल मिलेगा, निर्यात के नए अवसर खुलेंगे और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने में मदद मिलेगी। साथ ही क्षेत्र की कृषि विरासत को भी संरक्षण मिलेगा।



जीआई टैग से किसानों को मिलेगा बेहतर मूल्य, ऊंझा की पहचान होगी और मज़बूत

ऊंझा जीरा और सौंफ को जीआई पंजीकरण दिलाने में ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (APMC), गुजरात सरकार के बागवानी एवं किसान कल्याण विभाग, सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय और एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से प्रयास किए। जीआई टैग के माध्यम से इन मसालों को उत्तर गुजरात के ऊंझा क्षेत्र से उत्पन्न उत्पाद के रूप में कानूनी मान्यता मिली है। यह प्रमाणन उत्पादों की भौगोलिक पहचान के दुरुपयोग को रोकने के साथ-साथ घरेलू और वैश्विक बाज़ारों में उनकी विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।



राज्य सरकार के अनुसार, जीआई टैग वाले उत्पाद समान श्रेणी के सामान्य उत्पादों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों की आय बढ़ने, मसाला मूल्य श्रृंखला में मूल्य संवर्धन होने और निर्यात को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।



एशिया की बड़ी मसाला मंडियों में शामिल है ऊंझा, गुजरात के GI उत्पादों की सूची भी बढ़ी

गुजरात देश में जीरे का सबसे बड़ा उत्पादक है और सौंफ उत्पादन में भी अग्रणी राज्यों में शामिल है। इन दोनों फसलों की खेती मुख्य रूप से राज्य के शुष्क और अर्द्ध-शुष्क उत्तरी ज़िलों मेहसाणा, पाटन, बनासकांठा और गांधीनगर में होती है। ऊंझा एशिया की सबसे बड़ी मसाला मंडियों में से एक माना जाता है, जहाँ गुजरात के साथ-साथ पड़ोसी राजस्थान से आने वाला जीरा और सौंफ भी बड़ी मात्रा में कारोबार के लिए पहुँचता है।



भारत दुनिया का सबसे बड़ा जीरा उत्पादक और निर्यातक देश है तथा राष्ट्रीय उत्पादन और निर्यात में गुजरात की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब भारत मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के निर्यात और क्षेत्र विशेष के ब्रांडों को वैश्विक बाज़ार में बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रहा है, ऊंझा जीरा और सौंफ को मिला जीआई टैग इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस नई मान्यता के साथ गुजरात के जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पादों की सूची और विस्तृत हो गई है। इससे पहले गिर केसर आम, भालिया गेहूँ, कच्छी खारेक और अमलसाड़ी चीकू को भी जीआई टैग मिल चुका है। अधिकारियों का मानना है कि नई पहचान से गुजरात के मसाला उत्पादों की वैश्विक साख और बाज़ार पहुँच दोनों मज़बूत होंगी, साथ ही क्षेत्र की पारंपरिक कृषि विरासत को भी संरक्षण मिलेगा।

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