AI और स्विस तकनीक से ‘स्मार्ट’ बने यूपी के एक्सप्रेसवे, सड़कें खुद बताएगी अपनी हालत, स्पीड-सेफ्टी और क्वालिटी पर फोकस
उत्तर प्रदेश में अब सड़कें सिर्फ बनने तक सीमित नहीं हैं बल्कि खुद अपनी हालत बताने लगी हैं। योगी सरकार एक्सप्रेसवे निर्माण को नए दौर में ले जाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्विस तकनीक का इस्तेमाल कर रही है जिससे सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा और निगरानी पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो गई है। उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक सड़क निर्माण से आगे बढ़कर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। खास बात यह है कि गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
निर्माण के दौरान ही होगी निगरानी, खामियां तुरंत होंगी दूर
अब तक सड़कों की गुणवत्ता का आकलन काम पूरा होने के बाद किया जाता था जिससे खामियां सुधारने में समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। नई व्यवस्था में सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए सड़क निर्माण के दौरान ही उसकी गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। इससे छोटी-सी कमी भी उसी समय पकड़ में आ जाती है और तुरंत सुधार किया जा सकता है।
सेंसर और खास वाहन से ‘रीयल टाइम’ डेटा कलेक्शन
इस सिस्टम में एक खास वाहन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगे हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सड़क की सतह, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन से जुड़ा डेटा इकट्ठा करता है। यह तकनीक सड़क की ‘रीयल कंडीशन’ का वैज्ञानिक आकलन देती है, जो पारंपरिक विजुअल जांच से कहीं ज्यादा सटीक मानी जा रही है।
एआई तय करेगा सड़क की क्वालिटी, जवाबदेही भी बढ़ेगी
सेंसर से मिले डेटा को एआई सॉफ्टवेयर प्रोसेस करता है और सड़क को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी कैटेगरी में बांट देता है। इससे न सिर्फ गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। एआई सिस्टम इतनी बारीकी से काम करता है कि सड़क की छोटी से छोटी खामी भी छुप नहीं पाती।
स्मार्ट कैमरे पकड़ेंगे नियम तोड़ने वाले, हादसों में आएगी कमी
सरकार एक्सप्रेसवे पर संचालन के दौरान भी एआई का इस्तेमाल बढ़ा रही है। एआई कैमरे ओवरस्पीडिंग और गलत लेन में चलने जैसे नियम उल्लंघनों को खुद पहचानेंगे। इससे ट्रैफिक नियमों का पालन बेहतर होगा और सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ साझेदारी कर इस तकनीक को लागू किया है।