राहत की खबर: यूपी के किसानों को 4 मई को मिलेगा फसल नुकसान का मुआवजा, सीधे खातों में भेजे जाएंगे 122 करोड़ रूपये
उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को फसल नुकसान से राहत देने के लिए 4 मई को 122.28 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि जारी करेगी। यह पैसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2025 और रबी 2025-26 सीजन में हुए नुकसान के लिए दिया जाएगा। सरकार यह राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर करेगी, जिससे प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सके।
4 मई को पूरे प्रदेश में होगा भुगतान
प्रदेश के सभी जिलों में 4 मई को शाम 4 बजे से यह राशि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों को दी जाएगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और 60 जिलों में चल रही मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत यह भुगतान किया जा रहा है। निदेशक कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा सुमिता सिंह ने बताया, “4 मई को अपराह्न 4 बजे से प्रदेश के सभी जनपदों में खरीफ 2025 और रबी 2025-26 की फसल क्षतिपूर्ति धनराशि का वितरण किया जाएगा।”
खरीफ और रबी दोनों सीजन का पैसा मिलेगा
सरकार के मुताबिक खरीफ 2025 सीजन के लिए कुल 730.04 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति तय हुई थी, जिसमें से 624.88 करोड़ रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं। अब बाकी 105.16 करोड़ रुपये 4 मई को दिए जाएंगे। इसके साथ ही रबी 2025-26 सीजन के 17.11 करोड़ रुपये भी इसी दिन किसानों को मिलेंगे। इस तरह कुल मिलाकर 122.28 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जाएंगे। इससे पहले 21 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2.51 लाख किसानों को 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी थी।
लाखों किसानों को पहले भी मिल चुका है फायदा
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 से अब तक इस योजना के तहत 67.86 लाख किसानों को करीब 5755.68 करोड़ रुपये की मदद दी जा चुकी है। इस योजना में खरीफ की फसलें जैसे धान, मक्का, बाजरा, दालें और तिलहन, और रबी की फसलें जैसे गेहूं, चना, सरसों, मसूर और आलू शामिल हैं।
कम प्रीमियम में मिलता है बीमा का फायदा
इस योजना की खास बात यह है कि किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है। खरीफ फसल के लिए 2%, रबी के लिए 1.5% और नकदी फसलों के लिए अधिकतम 5% प्रीमियम तय है। बाकी पैसा केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं।
किसानों को मुश्किल समय में सहारा
सरकार का कहना है कि यह योजना किसानों को खराब मौसम या प्राकृतिक आपदा के समय आर्थिक सहारा देती है। इससे किसानों की आय को स्थिर रखने में मदद मिलती है और खेती में उनका भरोसा भी बढ़ता है।