Krishi Mela: दालों की खेती बढ़ाने पर सरकार का जोर, जून में इन तारीखों को लगेगा यूपी कृषि मेला, किसानों को मिलेंगे नए सुझाव
महंगाई के इस दौर में दालें आम लोगों की थाली का सबसे जरूरी हिस्सा हैं, लेकिन उत्पादन और मांग के बीच बढ़ते अंतर की वजह से इनके दाम अक्सर बढ़ जाते हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि किसान ज्यादा से ज्यादा दलहन फसलों की खेती करें, जिससे उत्पादन बढ़े और बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण रखा जा सके।
इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश में 14 से 16 जून तक राज्य स्तरीय कृषि मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में किसानों को बदलते मौसम, कम वर्षा की आशंका और फसल विविधीकरण को लेकर विशेषज्ञों से सीधे जानकारी मिलेगी।
कम बारिश की आशंका के बीच दलहन पर फोकस
इस वर्ष कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की संभावना को देखते हुए खेती की रणनीति बदलने की जरूरत है। ऐसे में अरहर, उड़द, मूंग, चना और मसूर जैसी दलहन फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती हैं।
दलहन फसलें कम पानी में भी अपेक्षाकृत अच्छी पैदावार देती हैं। साथ ही ये मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती हैं, जिससे अगली फसल को फायदा मिलता है।
कृषि मेले में क्या होगा खास?
तीन दिवसीय कृषि मेले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत किस्मों के बीज, जैविक खेती, जल संरक्षण और मौसम आधारित खेती के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा विभिन्न कृषि संस्थानों और वैज्ञानिकों द्वारा लाइव प्रदर्शन भी किए जाएंगे, ताकि किसान नई तकनीकों को समझकर अपने खेतों में लागू कर सकें।
दालों की बढ़ती मांग ने बढ़ाई चिंता
देश में दालों की खपत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन कई बार मांग के अनुरूप नहीं हो पाता। यही वजह है कि सरकार दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार विशेष अभियान चला रही है।
यदि किसान पारंपरिक फसलों के साथ दलहन को भी फसल चक्र में शामिल करें तो उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।
किसानों को मिलेंगे वैज्ञानिक सुझाव
मेले में कृषि वैज्ञानिक किसानों को बताएंगे कि कम बारिश की स्थिति में कौन-सी फसलें बेहतर रहेंगी, खेत में नमी कैसे बचाई जाए और सीमित पानी में अधिक उत्पादन कैसे लिया जाए।
साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन, उर्वरक उपयोग और फसल बीमा जैसी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी।
मिट्टी की सेहत सुधारने में मददगार हैं दलहन
दलहन फसलों की एक बड़ी खासियत यह है कि ये मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बढ़ाने का काम करती हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और खेती की लागत भी घट सकती है।
यही कारण है कि कृषि विभाग किसानों को दलहन खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मेला?
बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों के दौर में किसानों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह से जोड़ना बेहद जरूरी है। यह कृषि मेला किसानों को न सिर्फ नई जानकारी देगा, बल्कि उन्हें भविष्य की खेती के लिए बेहतर रणनीति बनाने में भी मदद करेगा।
कुल मिलाकर, यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि किसानों को मौसम, बाजार और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने का बड़ा मंच साबित हो सकता है।