इस तरह की खेती पर मिल सकती है ₹1 करोड़ तक की सब्सिडी, जानें कौन उठा सकता है लाभ और कैसे करें आवेदन
खेती में मौसम की मार, बढ़ती लागत और फसलों के सही दाम न मिलने की वजह से किसान अब ऐसे तरीक़े तलाश रहे हैं, जिनसे कम जोखिम में बेहतर कमाई की जा सके। पॉलीहाउस खेती इसी दिशा में एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आई है। इसमें किसान नियंत्रित माहौल में सब्ज़ियों, फूलों और दूसरी महंगी फसलों की खेती कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि पॉलीहाउस लगाने वाले किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी मिल सकती है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) और मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत पॉलीहाउस और दूसरी संरक्षित खेती के लिए मदद दी जाती है।
कुछ योजनाओं के तहत खेती की लागत का 50 प्रतिशत तक हिस्सा सब्सिडी के रूप में मिल सकता है और अधिकतम सहायता ₹1 करोड़ तक हो सकती है। किसान को मिलने वाली रकम उसकी जमीन, पॉलीहाउस का आकार, फसल, कुल लागत और बैंक से लिए गए लोन जैसी चीज़ों पर निर्भर करेगी। सब्सिडी परियोजना पूरी होने और जांच के बाद बैंक के लोन खाते में जमा की जाती है। इसलिए सिर्फ़ ₹1 करोड़ की सब्सिडी देखकर पॉलीहाउस लगाने का फैसला करने के बजाय पहले अपनी पात्रता और पूरी लागत की जानकारी लेना जरूरी है।
पॉलीहाउस के लिए कितनी जमीन चाहिए और कौन-सी फसल उगा सकते हैं?
सामान्य इलाक़ों में व्यावसायिक स्तर पर पॉलीहाउस खेती के लिए 2,500 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन की जरूरत हो सकती है। उत्तर-पूर्व और हिमालयी इलाक़ों के लिए जमीन से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए किसान को अपनी जमीन के हिसाब से पहले यह जांचना चाहिए कि उसकी परियोजना योजना के तहत आती है या नहीं।
पॉलीहाउस में किसान हाई-वैल्यू सब्ज़ियों के अलावा कई तरह के फूल भी उगा सकते हैं। इनमें जरबेरा, कार्नेशन, गुलाब, गुलदाउदी, लिलियम, ऑर्किड और एंथ्यूरियम जैसी फसलें शामिल हैं। हालांकि, आपकी परियोजना में कौन-सी फसल के लिए मदद मिलेगी, यह मौजूदा सरकारी गाइडलाइन के हिसाब से तय होगा।
सिर्फ़ पॉलीहाउस ही नहीं, इन चीज़ों पर भी मिल सकती है मदद
सरकार की सहायता केवल पॉलीहाउस का ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं है। खेती से जुड़ी कुछ दूसरी सुविधाओं के लिए भी मदद मिल सकती है। इसमें मल्चिंग, हाइड्रोपोनिक्स, एयरोपोनिक्स और पॉलीहाउस में हवा चलाने वाले सर्कुलेशन फैन जैसी चीज़ें शामिल हैं।
हालांकि, किसान को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि पॉलीहाउस पर होने वाला हर खर्च सब्सिडी में शामिल होगा। किस चीज़ पर कितनी लागत मानी जाएगी और कितनी मदद मिलेगी, यह सरकारी नियमों के हिसाब से तय होगा। इसलिए काम शुरू करने से पहले पूरी लागत का हिसाब लगाना बेहद जरूरी है।
आवेदन कहां करें और कौन-से कागज़ लगेंगे?
पॉलीहाउस के लिए आवेदन करने से पहले किसान को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की वेबसाइट पर जाकर योजना की ताज़ा जानकारी देखनी चाहिए। आवेदन की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होती है। आवेदन के दौरान जमीन के कागज़, परियोजना की जानकारी, अनुमानित खर्च, बैंक लोन से जुड़े कागज़ और बैंक खाते की जानकारी जैसी चीज़ें मांगी जा सकती हैं। हालांकि, आपकी परियोजना के हिसाब से दस्तावेज़ों की सूची अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले वेबसाइट पर पूरी जानकारी देखना बेहतर रहेगा।
किसान को आवेदन के लिए किसी एजेंट पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। पहले सरकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी देखें। अगर कोई एजेंट पैसे मांगता है तो उसकी विश्वसनीयता और शुल्क की पूरी जांच किए बिना भुगतान न करें।
पहले पॉलीहाउस बनाएं या सब्सिडी की जानकारी लें?
सबसे बड़ी गलती यह होगी कि किसान पहले पॉलीहाउस बनवा ले और बाद में सब्सिडी के लिए आवेदन करे। काम शुरू करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी जमीन और परियोजना योजना के नियमों में आती है या नहीं। पहले जमीन की जांच करें, फिर पॉलीहाउस का आकार और फसल तय करें। इसके बाद पूरी लागत का हिसाब बनाएं और बैंक लोन की जरूरत है तो उसकी प्रक्रिया शुरू करें।
परियोजना पूरी होने के बाद संबंधित विभाग की ओर से जांच और निरीक्षण किया जाता है। सब कुछ नियमों के मुताबिक होने पर मिलने वाली सब्सिडी बैंक के लोन खाते में जमा कर दी जाती है। यानी किसान के हाथ में अलग से नक़द ₹1 करोड़ नहीं आता। सब्सिडी की रकम बैंक के लोन में घट जाती है और किसान पर लोन का बोझ कम होता है।