बेहतर फसल की उम्मीद से नरम पड़े उड़द के दाम, लगातार दूसरे हफ्ते गिरीं कीमतें, बढ़ी बुआई और कमज़ोर माँग से बाज़ार पर दबाव
पिछले कुछ सप्ताह तक लगातार तेज़ी दिखाने वाली उड़द (काली दाल) की क़ीमतों में अब नरमी आने लगी है। बेहतर मानसून, खरीफ़ सीज़न में बढ़ी बुआई और अच्छी पैदावार की उम्मीद के बीच बाज़ार में दाम नीचे आने लगे हैं। दूसरी ओर दाल मिलों और व्यापारियों की ओर से माँग कमज़ोर रहने से भी उड़द की क़ीमतों पर दबाव बना हुआ है। कारोबारियों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो इस वर्ष उड़द का उत्पादन बेहतर हो सकता है, जिससे आने वाले महीनों में बाज़ार में पर्याप्त आपूर्ति रहेगी।
देश के कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में उड़द की खेती का रक़बा पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है। इससे नई फसल को लेकर सकारात्मक माहौल बना है। हालाँकि कुछ राज्यों में बुआई घटी है, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन को लेकर बाज़ार का भरोसा मज़बूत हुआ है। इसी कारण पिछले दो सप्ताह से घरेलू और आयातित दोनों तरह की उड़द की क़ीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
बढ़ी बुआई से मज़बूत हुई उत्पादन की उम्मीद
31 जुलाई तक देश में उड़द की बुआई बढ़कर 21.08 लाख हेक्टेयर पहुँच गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 19.80 लाख हेक्टेयर से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। उत्तर प्रदेश में उड़द का रक़बा 61 प्रतिशत बढ़कर 5.52 लाख हेक्टेयर हो गया है। मध्य प्रदेश में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ बुआई 6.72 लाख हेक्टेयर तक पहुँची है। राजस्थान में 20 प्रतिशत, गुजरात में 40 प्रतिशत, झारखंड में 72 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 21 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
हालाँकि कर्नाटक में उड़द का रक़बा 25 प्रतिशत घटकर 0.71 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि महाराष्ट्र में इसमें 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद प्रमुख उत्पादक राज्यों में बढ़ी बुआई से कुल उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
लगातार दूसरे सप्ताह नरम पड़े दाम
कृषि मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार 3 अगस्त तक देश में उड़द का औसत थोक मंडी भाव घटकर 8,638 रुपये प्रति क्विंटल रह गया, जबकि एक सप्ताह पहले यह 8,908 रुपये और दो सप्ताह पहले 8,980 रुपये प्रति क्विंटल था। लगभग तीन सप्ताह पहले उड़द का औसत थोक भाव बढ़कर 9,132.55 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गया था।
इंडिया पल्सेज़ एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) ने भी कहा है कि 1 अगस्त को समाप्त सप्ताह में घरेलू और आयातित दोनों तरह की उड़द की क़ीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई। बेहतर बुआई, आयात बढ़ने की संभावना और कमज़ोर माँग ने बाज़ार पर दबाव बनाया है।
आयात, नई फसल और कम माँग से दबाव बरक़रार
बिजनेस लाइन के अनुसार, व्यापार जगत का मानना है कि फिलहाल उड़द की क़ीमतों पर दबाव बना रह सकता है। म्यांमार से आने वाली उड़द की आपूर्ति, रुपये की मज़बूती और चेन्नई बंदरगाह पर अगस्त के मध्य तक लगातार आयात होने से बाज़ार में आपूर्ति बढ़ रही है। वहीं दाल मिलों और व्यापारियों की ख़रीद भी सीमित बनी हुई है क्योंकि उड़द दाल और गोटा की माँग अपेक्षाकृत कमज़ोर है।
आईपीजीए के अनुसार यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो खरीफ़ उड़द की नई फसल अच्छी रहने की उम्मीद है। नई फसल की आवक सितंबर के मध्य से शुरू होकर महीने के अंत तक तेज़ हो सकती है। इसी दौरान ब्राज़ील से आने वाली खेप भी बाज़ार में पहुँचेगी, जिससे आने वाले समय में उड़द की क़ीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है।