यूरिया उत्पादन का बदलेगा फॉर्मूला! गैस नहीं, अब कोयले से बनेगी खाद; सरकार जल्द ला सकती है नई नीति

Gaon Connection | May 29, 2026, 11:03 IST
भारत सरकार यूरिया उत्पादन बढ़ाने के लिए एक नई नीति लाने की तैयारी में है। यह नीति कोयला गैसीकरण पर आधारित होगी। इससे आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम होगी और देश आत्मनिर्भर बनेगा। यह नीति अगले एक महीने में लागू हो सकती है। इससे देश के कोयला भंडार का बेहतर उपयोग होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

देश में यूरिया उत्पादन को बढ़ावा देने और आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार जल्द नई नीति ला सकती है। सरकार कोयला गैसीकरण (कोल गैसीफिकेशन) आधारित यूरिया उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी में है और इसके लिए नई नीति अगले एक महीने के भीतर जारी की जा सकती है। नई दिल्ली में सरकार की कोयला गैसीफिकेशन योजना को बढ़ावा देने के लिए आयोजित रोड शो के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोयला गैसीफिकेशन आधारित यूरिया निर्माण नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है और अगले एक महीने में इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।



विदेशी गैस पर निर्भरता कम करने की कोशिश

अधिकारी ने कहा कि भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। करीब 25 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विभिन्न देशों से आयात की जाती है। ऐसे में कोयले से यूरिया बनाने की तकनीक देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा की बचत में भी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यूरिया का कारोबार सरकार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और घरेलू संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित हो सकता है।



उर्वरक मंत्रालय तैयार कर रहा है नई नीति

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय पिछले कुछ समय से नई यूरिया नीति पर काम कर रहा है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय की ओर से सुझाव दिया गया था कि नई यूरिया नीति में कोयला गैसीफिकेशन आधारित यूरिया उत्पादन को भी शामिल किया जाए। यह प्रस्ताव अब काफी उन्नत चरण में पहुंच चुका है और अगले एक महीने में नीति सामने आ सकती है।



कैसे बनती है कोयले से यूरिया?

कोयला गैसीफिकेशन तकनीक में कच्चे कोयले और पेट कोक को उच्च तापमान पर ऑक्सीकरण करके सिंथेटिक गैस (सिंगैस) तैयार की जाती है। इस गैस में मुख्य रूप से हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड मौजूद होते हैं। इसके बाद हाइड्रोजन को हवा से प्राप्त नाइट्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया तैयार किया जाता है। फिर अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड की प्रतिक्रिया से यूरिया का उत्पादन होता है। इस प्रक्रिया में प्राकृतिक गैस की जगह कोयले का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।



उद्योग जगत की लंबे समय से मांग

एक घरेलू कोल गैसीफिकेशन कंपनी ने पहले सरकार को पत्र लिखकर मांग की थी कि कोयला आधारित यूरिया परियोजनाओं को गैस आधारित संयंत्रों के बराबर सुविधाएं दी जाएं। कंपनी ने कहा था कि कोयला आधारित यूरिया परियोजनाओं के लिए भी उत्पादन खरीद की गारंटी (ऑफटेक एश्योरेंस) और अलग क्षमता आवंटन जैसी व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़ सके।



महाराष्ट्र में प्रस्तावित है बड़ा प्रोजेक्ट

महाराष्ट्र की कंपनी न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन ने सरकार को भेजे अपने प्रस्ताव में कहा है कि कोयला गैसीफिकेशन आधारित यूरिया परियोजनाओं को गैस आधारित संयंत्रों के समान अवसर मिलने चाहिए। कंपनी चंद्रपुर जिले के भद्रावती क्षेत्र में 1.27 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला कोयला गैसीफिकेशन आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा कंपनी चंद्रपुर में ही 5 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजना भी विकसित कर रही है।



कोयला भंडार का बेहतर उपयोग करना चाहती है सरकार

सरकार लंबे समय से यूरिया उत्पादन के लिए वैकल्पिक फीडस्टॉक स्रोतों की तलाश में है। इसका उद्देश्य आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करना और देश के विशाल कोयला भंडार का अपेक्षाकृत स्वच्छ तकनीकों के जरिए बेहतर उपयोग करना है। नई नीति आने के बाद कोयला गैसीफिकेशन आधारित यूरिया परियोजनाओं में निवेश बढ़ने और घरेलू उर्वरक उत्पादन क्षमता मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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