उत्तर प्रदेश आम महोत्सव 2026: 800 से अधिक आम की किस्में, किसानों को बाज़ार से जोड़ने की पहल

Lata Mishra | Jul 03, 2026, 16:04 IST
3 से 5 जुलाई तक लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026 में 800 से अधिक आम की किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। यह आयोजन केवल आम की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि किसानों को खरीदारों, निर्यातकों और नई तकनीकों से जोड़ने का मंच भी है। पहली बार आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, तकनीकी कार्यशालाएँ और बढ़ते निर्यात के अवसर इस महोत्सव को किसानों के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं। हालांकि, किसानों को स्थायी लाभ पहुँचाने के लिए बेहतर बाज़ार, भंडारण और निर्यात का विकास भी आवश्यक है।

3 जुलाई से लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026 की शुरुआत हो गई है। 5 जुलाई तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में 800 से अधिक आम की किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। पहली नज़र में यह एक सांस्कृतिक और कृषि प्रदर्शनी लगता है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल आम की विविधता दिखाना नहीं, बल्कि आम उत्पादक किसानों को बेहतर बाज़ार, नई तकनीक और निर्यात के अवसरों से जोड़ना भी है।



उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य है। प्रदेश में लगभग 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है और सालाना 61.96 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है, जो देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 26.22 प्रतिशत है। दशहरी, लंगड़ा, चौसा, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली जैसी किस्में देश के साथ-साथ विदेशों में भी लोकप्रिय हैं।



किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह महोत्सव?



इस बार महोत्सव में पहली बार क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। 4 जुलाई को होने वाले इस सम्मेलन में आम उत्पादक किसान सीधे खरीदारों, व्यापारियों और निर्यातकों से बातचीत कर सकेंगे। इससे किसानों को नए बाज़ार मिलने और बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। महोत्सव में बागवानों के लिए आधुनिक बाग प्रबंधन, तुड़ाई के बाद फलों के संरक्षण, कीट एवं रोग नियंत्रण और विपणन जैसे विषयों पर तकनीकी कार्यशालाएँ भी आयोजित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य किसानों को बदलती तकनीक और बाज़ार की ज़रूरतों के बारे में जानकारी देना है।



आम की बढ़ती वैश्विक पहचान



प्रदेश से आम और आम के पल्प का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 404 मीट्रिक टन आम और पल्प का निर्यात हुआ था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 3,563 मीट्रिक टन हो गया। उत्तर प्रदेश का आम अब यूनाइटेड किंगडम, यूएई, सऊदी अरब, जापान, सिंगापुर, क़तर, रूस और कई अन्य देशों तक पहुँच रहा है। निर्यात में बढ़ोतरी किसानों के लिए नए अवसर लेकर आ सकती है, बशर्ते उन्हें गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग और बाज़ार तक पहुँच जैसी सुविधाएँ समय पर मिलें। केवल उत्सव नहीं, कृषि अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा आयोजन आम महोत्सव में बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता, आम से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता और आम के पौधों की बिक्री भी की जा रही है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे कम से कम एक आम का पौधा लगाएँ, ताकि बागवानी को बढ़ावा मिल सके।



हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ऐसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। बेहतर भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, निर्यात अवसंरचना और किसानों की बाज़ार तक सीधी पहुँच सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है। फिर भी, उत्तर प्रदेश आम महोत्सव यह संकेत देता है कि अब आम केवल स्वाद का विषय नहीं, बल्कि किसानों की आय, कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

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