उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टले, क्या मौजूदा प्रधान ही चलाएंगे ग्राम पंचायतें? योगी सरकार का बड़ा फैसला

Preeti Nahar | May 26, 2026, 09:40 IST
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है। नई पंचायतों के गठन या अधिकतम छह माह तक वही पंचायतों के सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे।
 प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक

देश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के बीच Yogi Adityanath सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब नई पंचायतों के गठन तक गाँवों की जिम्मेदारी मौजूदा ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत पहली बार प्रदेश में ग्राम प्रधानों को ही “प्रशासक” बनाकर पंचायतों का संचालन कराया जाएगा। इसे राज्य की पंचायत व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।



26 मई को समाप्त हो रहा पंचायतों का कार्यकाल

उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने तय किया है कि निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।



नई पंचायतों के गठन तक संभालेंगे जिम्मेदारी

सरकार के अनुसार नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं।



सीएम योगी के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों को निवर्तमान प्रधानों को ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक नामित करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। आदेश के अनुसार 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।



केवल सामान्य और रूटीन कार्यों की होगी अनुमति

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासकों को केवल सामान्य और नियमित कार्यों के निर्वहन की अनुमति होगी। उनके द्वारा कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया जा सकेगा।



विशेष परिस्थितियों में डीएम से लेनी होगी मंजूरी

यदि किसी अत्यावश्यक या विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ती है, तो उस प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा। जिलाधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा।



सरकार को है प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार

ज्ञात हो कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार प्राप्त है।

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