UP CABINET NEWS: पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा, अब मिलेंगे ₹12,000 प्रतिमाह
कभी ₹4,000 महीने में इंटर्नशिप पूरी करने को मजबूर पशु चिकित्सा के छात्र अब ₹12,000 प्रतिमाह पाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया। बढ़ती महंगाई और लंबे प्रशिक्षण के बीच यह फैसला सिर्फ भत्ता बढ़ाने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। आखिर क्यों सरकार ने अचानक यह बड़ा फैसला लिया और इससे किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा, जानिए विस्तार से।
किन छात्रों को मिलेगा लाभ?
यह बढ़ा हुआ इंटर्नशिप भत्ता प्रदेश के तीन प्रमुख कृषि एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को मिलेगा। इन विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों को अब इंटर्नशिप के दौरान पहले की तुलना में तीन गुना अधिक राशि मिलेगी। इनमें शामिल हैं:
- उ0प्र0 पं० दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान
- आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय
- सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है, जहाँ विशाल जनसंख्या के साथ बड़ी पशुधन संख्या भी मौजूद है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। सरकार का कहना है कि पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य, उन्नत नस्ल संवर्धन, पशु महामारियों के नियंत्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पशु चिकित्सकों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग देना जरूरी है।
छात्रों का बढ़ेगा मनोबल
सरकार के अनुसार, अन्य राज्यों में पशु चिकित्सा छात्रों को अधिक इंटर्नशिप भत्ता दिया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में भी यह राशि बढ़ाई गई है ताकि छात्रों में समानता की भावना बनी रहे और उनका उत्साह बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अधिक छात्र पशु चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित होंगे और भविष्य में प्रदेश को प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की बेहतर उपलब्धता मिल सकेगी।
सरकार पर कितना आएगा अतिरिक्त खर्च?
इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी आएगा। तीनों विश्वविद्यालयों में स्वीकृत लगभग 300 छात्रों के लिए इस फैसले के बाद करीब ₹4.20 करोड़ का अतिरिक्त व्यय होने का अनुमान लगाया गया है। इस अतिरिक्त खर्च की व्यवस्था विश्वविद्यालयों को दिए जाने वाले शासकीय अनुदान के अंतर्गत गैर-वेतन मद (Non Salary Head) से की जाएगी।
पशुपालन क्षेत्र को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित और उत्साहित पशु चिकित्सक प्रदेश में पशुओं की बेहतर चिकित्सा और देखभाल सुनिश्चित करेंगे। इससे दुग्ध उत्पादन, पशुधन विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का यह फैसला केवल छात्रों के लिए राहत नहीं, बल्कि पशुपालन क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।