जनभागीदारी से बदली छत्तीसगढ़ के बलोद की तस्वीर! 2.84 लाख जगहों पर हुआ जल संरक्षण का काम, सहेजी बारिश की हर बूंद
बरसात का पानी अगर सहेज लिया जाए, तो वही पानी गर्मियों में खेतों को सींच सकता है और लोगों की प्यास भी बुझा सकता है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि बारिश का ज़्यादातर पानी बहकर निकल जाता है। छत्तीसगढ़ के बलोद ज़िले ने इस तस्वीर को बदलने की कोशिश की है। यहाँ गाँवों में लोगों ने मिलकर ऐसे इंतज़ाम किए हैं कि अब बारिश की हर बूंद ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन में समा सके और ज़रूरत के समय काम आ सके।
इस बदलाव की झलक इस मानसून में साफ़ दिखाई दे रही है। जहाँ पहले कई जल संरचनाएँ सूखी पड़ी रहती थीं, वहीं अब वे बारिश के पानी से भर चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 135वें संस्करण में कैच द रेन अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की थी। इसके बाद बलोद में जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 के तहत ग्राम पंचायतों, स्थानीय लोगों और ज़िला प्रशासन ने मिलकर बड़े पैमाने पर जल संरक्षण का काम किया। जून 2025 से मई 2026 के बीच ज़िले में 2,84,917 जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़ी संरचनाएँ तैयार की गईं।
गाँवों में दिखने लगा असर, सूखे इलाक़ों में भी पानी का बढ़ा सहारा
बलोद के कई गाँवों में जल संरक्षण के प्रयास अब ज़मीन पर नज़र आने लगे हैं। ग्राम पंचायत मुंदेरा में बोरवेल के पास बनाए गए रिचार्ज गड्ढे बारिश के पानी को सीधे ज़मीन के भीतर पहुँचा रहे हैं। कोंगनी में बनाए गए रिचार्ज पिट वर्षा के पानी को बहने से रोककर भूजल स्तर बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। ओदरसाकरी और खुटेरी ग्राम पंचायतों के चेक डैम अब मानसून का पानी रोक रहे हैं, जिससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है और भूजल पुनर्भरण में भी सुधार हो रहा है। मुंदेरा में लंबे समय से बंद पड़े बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट के ज़रिये दोबारा उपयोगी बनाया गया है।
भाथागाँव (आर) में बनाई गई कंटूर ट्रेंचें वर्षा के पानी का बहाव कम कर रही हैं। इससे मिट्टी में नमी बनी हुई है और वृक्षारोपण के साथ जलसंभर विकास को भी सहारा मिला है। वहीं, ज़िले के अलग-अलग हिस्सों में बने सामुदायिक बाँध खेती और आसपास के गाँवों के लिए पानी का स्थायी स्रोत बनते जा रहे हैं। इन परियोजनाओं की पहले और बाद की तस्वीरें भी इस बदलाव की कहानी बयां करती हैं। जो जल संरचनाएँ मानसून से पहले सूखी दिखाई देती थीं, वे अब बारिश के पानी से लबालब भरी हुई हैं।
14 किलोमीटर लंबे तवेरा नाले को मिला नया जीवन, पहले भी मिल चुका है राष्ट्रीय सम्मान
बलोद की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गंडरदेही ब्लॉक के भाथागाँव (आर) स्थित 14.3 किलोमीटर लंबे तवेरा नाले का पुनर्जीवन भी शामिल है। कैच द रेन अभियान और जल संचय जन भागीदारी के तहत यहाँ 6,250 से अधिक जल संरक्षण संरचनाएँ बनाई गईं। इनमें चेक डैम, खाइयाँ, मैजिक पिट, सोक पिट, इंजेक्शन वेल, वर्षा जल संचयन प्रणाली और ग्रे-वॉटर ट्रीटमेंट सुविधाएँ शामिल हैं।
इन कार्यों से लगभग 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल संरक्षित होने की उम्मीद है। साथ ही, भूजल स्तर में 5 से 10 फ़ीट तक सुधार आने का अनुमान है। इससे सिंचाई व्यवस्था मज़बूत होने के साथ खेती की संभावनाएँ भी बेहतर हुई हैं और स्थानीय पर्यावरण को भी फ़ायदा मिला है।
बलोद इससे पहले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) 1.0 के दौरान ज़िले में 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया था। इस उपलब्धि के लिए कैच द रेन अभियान के तहत बलोद को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा और पूर्वी क्षेत्र में पहला स्थान मिला था। इसके लिए ज़िले को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। अब मौजूदा मानसून में बलोद का यह मॉडल दिखा रहा है कि जब प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर काम करते हैं, तो बारिश की हर बूंद को बचाना सिर्फ़ एक अभियान नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिखने वाला बदलाव भी बन सकता है।