Monsoon Forecast: इस राज्य में कमजोर रह सकता है मानसून, 92 फिसदी बारिश में कमी का अनुमान, कृषि और जल संकट की बढ़ सकती है चुनौती

Preeti Nahar | Jun 16, 2026, 13:50 IST
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मौसम विभाग ने मानसून 2026 का नया अनुमान बताया है। जून से सितंबर तक सामान्य से कम बारिश की आशंका है, जो LPA का करीब 90% रह सकती है। अल नीनो के असर से खेती, पानी और किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। क्या इस बार कमजोर रहेगा मानसून और खरीफ फसलों पर पड़ेगा क्या असर, जानिए इस आर्टिकल में।

दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 को लेकर मौसम विभाग ने नया पूर्वानुमान जारी किया है। इसके मुताबिक, इस बार जून से सितंबर तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रह सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे मानसून सीजन में बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) की करीब 90 फीसदी रह सकती है। हालांकि इसमें 4 फीसदी तक का अंतर संभव है।



मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय प्रशांत महासागर में ENSO की स्थिति सामान्य से बदलकर अल नीनो (El Nino) की तरफ बढ़ रही है। अनुमान है कि मानसून के दौरान अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है। वहीं, हिंद महासागर में फिलहाल IOD की स्थिति सामान्य (Neutral) बनी हुई है और मानसून के पूरे सीजन में इसके ऐसे ही रहने की संभावना जताई गई है।



हिमाचल प्रदेश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान ज्यादातर इलाकों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। राज्य में मानसूनी बारिश 92 फीसदी से कम रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, किन्नौर जिले के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश होने की संभावना है। वहीं लाहौल-स्पीति के कुछ क्षेत्रों और उत्तरी चंबा में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में जून से सितंबर तक मानसून सीजन की सामान्य बारिश 734.4 मिलीमीटर मानी जाती है।



कम बारिश से किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर?

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मानसून कमजोर रहने की स्थिति में कई क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। कम बारिश का सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है जैसे कृषि क्षेत्र, पानी की उपलब्धता, जल विद्युत उत्पादन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र। अगर ऐसा होता है तो बारिश की कमी से सूखे जैसी स्थिति, गर्मी का दबाव और पेयजल संकट का खतरा भी बढ़ सकता है।



किसानों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

कम बारिश की स्थिति में किसानों को सिंचाई की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है। खासतौर पर बारिश पर निर्भर खेती करने वाले किसानों को फसल प्रबंधन में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। मौसम विभाग ने किसानों के लिए जल संरक्षण, बेहतर सिंचाई प्रबंधन और मौसम आधारित कृषि योजना अपनाने की सलाह दी है। इसके अलावा सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने पर भी जोर दिया गया है।



हिमाचल के जिलों में सामान्य मानसूनी बारिश

हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मानसून सीजन की सामान्य बारिश इस प्रकार है:



जिलासामान्य बारिश (मिमी)
बिलासपुर819.1
चंबा853.4
हमीरपुर973.2
कांगड़ा1622.4
किन्नौर247.8
कुल्लू548
लाहौल-स्पीति382.9
मंडी1097.5
शिमला627.5
सिरमौर1183.8
सोलन874.3
ऊना953
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