Weather Update: देशभर में कहीं बारिश तो कहीं लू का असर जारी, भारी बारिश और गर्मी से फसलों को बचाने के लिए किसान अपनाएं ये उपाय
देश के कई हिस्सों में इन दिनों मौसम तेजी से बदल रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर बना हुआ है। वहीं, महाराष्ट्र और विदर्भ के कुछ इलाकों में गर्मी का असर अभी भी कायम है और मौसम विभाग ने लू जैसी स्थिति को लेकर अलर्ट जारी किया है।
कई राज्यों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर हवा की गति इससे भी अधिक रह सकती है। पहाड़ी राज्यों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक मौसम का असर अलग-अलग देखने को मिल रहा है। कहीं बारिश से राहत मिल रही है तो कहीं गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है।
मॉनसून की रफ्तार बढ़ी, कई राज्यों तक पहुंचा मानसून
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 13 जून 2026 तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून महाराष्ट्र के हरनाई, सोलापुर, तेलंगाना के कुछ हिस्सों, ओडिशा, झारखंड और बिहार तक पहुंच चुका है। अगले 2 से 3 दिनों के दौरान कर्नाटक के शेष हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में मानसून आगे बढ़ने के लिए मौसम अनुकूल बना हुआ है।
मॉनसून के आगे बढ़ने से दक्षिण और पूर्वी भारत में बारिश का दायरा बढ़ने की संभावना है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
14 जून 2026 को कैसा रहेगा देशभर का मौसम?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 14 जून को उत्तर भारत में मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में कई जगह हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं।
राजस्थान में तेज हवाओं के साथ धूलभरी आंधी जैसी स्थिति बन सकती है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम सामान्य रहने की संभावना है, हालांकि कुछ इलाकों में बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है।
मध्य भारत के मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में कुछ स्थानों पर बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। वहीं महाराष्ट्र और विदर्भ के कुछ हिस्सों में गर्मी से अभी पूरी राहत मिलने की संभावना नहीं है।
पूर्वी और दक्षिण भारत में बारिश के आसार
बिहार, झारखंड, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय और पूर्वोत्तर राज्यों में कई जगह बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है।
दक्षिण भारत में केरल, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों में मानसूनी बारिश जारी रहने के संकेत हैं। कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।
दिल्ली-NCR में बादलों की आवाजाही, तापमान 39 डिग्री तक
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 14 जून को आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। दोपहर या शाम के समय गरज वाले बादल बनने के आसार हैं।
दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। पश्चिमी दिशा से चलने वाली हवाओं की रफ्तार दिन के समय बढ़ सकती है।
15 जून को भी मौसम लगभग इसी तरह रहने का अनुमान है, जबकि 16 जून तक तापमान दोबारा बढ़कर 39 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालांकि, बादलों और स्थानीय बारिश से कुछ राहत मिलने की संभावना बनी रहेगी।
15 से 19 जून तक मौसम का पूर्वानुमान
उत्तर-पश्चिम भारत में 15 से 19 जून के बीच राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के इलाकों में रुक-रुककर बारिश और गरज-चमक की संभावना है। 17 जून तक कुछ क्षेत्रों में तापमान 4 से 6 डिग्री तक बढ़ सकता है।
मध्य भारत में मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में स्थानीय बारिश जारी रह सकती है। वहीं 17 जून के बाद कुछ इलाकों में तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है।
पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में लगातार बारिश और कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
पश्चिम भारत में गुजरात, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन कई हिस्सों में उमस और गर्मी का असर जारी रह सकता है।
किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह
बारिश वाले क्षेत्रों के किसानों को सलाह दी गई है कि खेतों में जल निकासी की व्यवस्था पहले से कर लें, ताकि जलभराव से धान की नर्सरी, सब्जियों, मक्का, अदरक, केला और बागवानी फसलों को नुकसान न पहुंचे।
तेज हवा और आंधी की संभावना वाले क्षेत्रों में कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें। फसल को तिरपाल से ढककर सुरक्षित स्थान पर रखें।
फलदार पौधों, सब्जियों और लंबी फसलों को सहारा दें, जिससे तेज हवा में फसल गिरने से बच सके। वहीं लू प्रभावित क्षेत्रों में किसान हल्की सिंचाई करते रहें और मिट्टी में नमी बनाए रखें।
पशुपालकों के लिए सलाह
गर्मी वाले क्षेत्रों में पशुओं को दोपहर के समय खुले में रखने से बचें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में साफ पानी उपलब्ध कराएं। चारे को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें।
पोल्ट्री फार्म में तापमान नियंत्रण की व्यवस्था रखें। मत्स्य पालन वाले क्षेत्रों में भारी बारिश की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पानी निकासी की तैयारी करना जरूरी है।
किसानों को सलाह दी गई है कि नई बुवाई या रोपाई से पहले स्थानीय मौसम की स्थिति जरूर देखें, ताकि अचानक मौसम बदलाव से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।