Fertilizer Price Alert: West Asia संकट से खाद की सप्लाई पर असर, क्या मंहगी होगी खेती! जानिए किसानों के लिए NABARD की पूरी रिपोर्ट
West Asia Crisis Impact on Agriculture: पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर दुनियाभर के व्यापार और ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इसका भारत की खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? नाबार्ड (NABARD) के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर अजय कुमार सूद के अनुसार, भारत इस संकट के प्रभावों से निपटने की स्थिति में है और खरीफ 2026-27 सीजन में कृषि क्षेत्र पर इसका असर बहुत ज्यादा नहीं पड़ने की उम्मीद है।
अजय कुमार सूद ने बताया कि संघर्ष से पहले दुनिया के करीब 30 फीसदी फर्टिलाइजर व्यापार, 20 फीसदी LNG व्यापार और 27 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरती थी। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार पर दबाव बन सकता है, लेकिन भारत के पास इससे निपटने के लिए पर्याप्त भंडार और तैयारी मौजूद है।
भारत के पास अनाज का मजबूत भंडार
नाबार्ड के अनुसार, भारत के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है। इससे खाद्य सुरक्षा पर तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं है। देश में अनाज की उपलब्धता मजबूत होने के कारण वैश्विक संकट का सीधा असर आम लोगों पर कम पड़ने की संभावना है।
यूरिया की कीमतों पर नहीं पड़ेगा असर
किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि फिलहाल यूरिया की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है। सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ उर्वरकों पर असर पड़ सकता है।
LNG और पेट्रोलियम पर सरकार की नजर
अजय कुमार सूद ने बताया कि भारत में फर्टिलाइजर उत्पादन के लिए घरेलू LNG की उपलब्धता पहले से बेहतर हुई है। वहीं पेट्रोलियम कीमतों में कुछ बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह बहुत सीमित स्तर पर रही है।
उन्होंने कहा कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर फिलहाल फर्टिलाइजर सेक्टर पर पड़ सकता है, जबकि कृषि के दूसरे क्षेत्रों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है।
सरकार उठा रही कई कदम
किसानों को राहत देने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। इनमें:
- खेत बचाओ अभियान
- नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग
- PM-KUSUM योजना के तहत सोलर सिंचाई
- नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
खरीफ 2026-27 पर कितना असर?
नाबार्ड के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत का कृषि क्षेत्र काफी हद तक सुरक्षित स्थिति में है। मजबूत अनाज भंडार, बेहतर घरेलू व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के कारण खरीफ 2026-27 में खेती पर बहुत बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि, किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।