Ground Report: '6 से अधिक भाई-बहन का बहाना, काग़ज़ पूरे, फिर भी कट गया वोट', जानें SIR पर क्या बोले प.बंगाल के गाँव के लोग

Gaon Connection | Apr 16, 2026, 17:04 IST
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पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से 34 लाख नाम हटने से लोगों में चिंता है। नक्सलबाड़ी के शेबताला गाँव में लोगों ने बताया कि उनके नाम बिना किसी स्पष्ट कारण के हटाए गए हैं। कई लोगों के पास सभी ज़रूरी दस्तावेज़ होने के बावजूद उनके वोटिंग अधिकार छीन लिए गए हैं।
अपनी बात बतातीं शेबताला की महिलाएं

Ground Report: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 34 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का मुद्दा पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले बड़ा सवाल बन गया है। इसका ज़मीनी असर क्या है और लोगों की जिंदगी पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है—इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए ‘गाँव कनेक्शन’ की टीम नक्सलबाड़ी (दार्जिलिंग) के शेबताला गाँव पहुंची। यहां कुछ लोगों ने कहा, “ज्यादातर मुस्लिम को टारगेट करके जैसे जिसका मोहम्मद हो या अंसारी हो या खान हो या पठान हो तो उनको ज्यादा टारगेट किया गया। किस वजह से नाम काटा वो हम लोग को थोड़ा बहुत जानकारी देना जरूरी है।”



अफसाना खातून ने कही ये बात

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शेबताला की निवासी अफसाना खातून ने कहा, “वोटर लिस्ट में मेरे पति का नाम है। सासू मां का है। मेरे ससुर का है। मेरे एक देवर का है और एक देवर का और मेरा नाम कट गया है। सेम डॉक्यूमेंट्स दिया है वो लोग भी सेम डॉक्यूमेंट्स हम भी दिए हैं। उसमें अब मेरा कैसे कट गया? वही सवाल है। मेरा आधार कार्ड में और वोट कार्ड में सिर्फ खातून की वजह से थोड़ा सा मिस्टेक है। उसमें दो अक्षर का मिस्टेक है। हम और दो बार हम वोट दे चुके हैं। इस बार नहीं हुआ मेरा। कोई कारण नहीं बताया गया। कुछ कारण नहीं बताया। डॉक्यूमेंट जो आधार कार्ड, वोट कार्ड, राशन कार्ड, बर्थ सर्टिफिकेट सब है… सब है।”



रहीम अंसारी ने बताई यह वजह

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गाँव के ही रहीम अंसारी बोले, “हम लोग सुना कि एसआईआर हो रहा है… हम लोग तो इंडियन सिटीजन है, हम लोग का कोई रिस्की नहीं है। हम लोग का पास 1975 का जो मेरा डॉक्यूमेंट है… 2002 में मेरे बाप ने वोट दिया है। लेकिन बाद में हम लोग देखा उसमें एडजुडिकेशन में डाला गया हम लोग को… बाद में नाम डिलीट किया गया। नोटिस में लिखा था कि छह भाई बहन से ज्यादा होने का वजह से मतलब मेरे पिताजी को मेरे अलावा और छह लोगों ने गार्जियन के तौर पर शामिल किया है… हम लोग समझ नहीं पाए। ट्राइबनल किया, डीएम ऑफिस भी गए… लेकिन कोई रिजल्ट नहीं मिला। अभी वोट का सात-10 दिन बचा है… और हमें बोला गया कि इस बार वोट नहीं दे सकते।”



सारे डॉक्यूमेंट सबमिट किए फिर भी नाम कट गया: अनारुल

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अनारुल नामक युवक ने कहा, “पता चला मार्च का 27 तारीख को जब एक नोटिस आया… लगभग 74 आदमी का नाम कटा गया। हम लोग जितना कोशिश किए… पंचायत में भी गए, ऑनलाइन फॉर्म भी भरे… लेकिन कुछ पता नहीं चला। मैं दार्जिलिंग डीएम ऑफिस गया… वहां जाकर डॉक्यूमेंट सबमिट किया। मेरे पास दादा जी, पिताजी सबका डॉक्यूमेंट है… 2002 का भी है। फिर भी नाम कट गया। नोटिस में लिखा है कि मेरे अलावा और छह आदमी पिताजी बोल के सबमिट किया है…वो छह आदमी कौन है, हमको नहीं पता।”



असली कारण क्या है, नहीं बताया गया: आसिफ अंसारी

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शेबताला में ही रहने वाले आसिफ अंसारी ने बताया, “एक नोटिस आया कि आपका नाम वोटर लिस्ट से कुछ एलिमेंट के वजह से काटा गया… या पापा का नाम मिसमैच है या फैमिली में ज्यादा लोग हैं। लेकिन असली कारण क्या है, ये नहीं बताया गया। कौन सा डॉक्यूमेंट में मिसमैच हुआ… ये भी नहीं दिखाया गया। हम लोग सात जन हैं… लेकिन ये साफ नहीं है कि इसी वजह से कटा या कुछ और।”

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