अब मानसून के रास्ते में आई ये बड़ी रुकावट, IMD लगातार कर रहा मॉनिटर, जानें ताज़ा अपडेट

Gaon Connection | May 28, 2026, 18:13 IST
भारत के विभिन्न हिस्सों में मानसून की दस्तक का बेसब्री से इंतजार हो रहा है, लेकिन हाल के मौसम में आई एक पश्चिमी विक्षोभ ने चीज़ों को थोड़ा उलझा दिया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह विक्षोभ दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति को बाधित कर सकता है, जिससे केरल तट पर मानसून की एंट्री में देरी हो सकती है।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस पर IMD की नजर

देशभर में मानसून के इंतजार के बीच मौसम ने नया मोड़ ले लिया है। अब एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सिस्टम केरल तट पर मानसून की समय पर एंट्री और उसके व्यवस्थित आगे बढ़ने में बाधा बन सकता है। भारत मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत का तापमान इतना बढ़ चुका है कि मानसून को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी दबाव तंत्र बन सके। लेकिन अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से यह संतुलन बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।



केरल तट पर अब भी कमजोर दिख रहा मानसून

गुरुवार दोपहर केरल के तट के पास बादल बनने और संवहनीय गतिविधियां जरूर देखी गईं, लेकिन वे मानसून की आधिकारिक शुरुआत के लिए पर्याप्त नहीं मानी गईं। मौसम विभाग के संकेत हैं कि मानसून को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। आमतौर पर जब उत्तर भारत की जमीन तेजी से गर्म होती है, तब समुद्र और जमीन के बीच दबाव का अंतर बनता है। यही अंतर अरब सागर से नमी भरी हवाओं को केरल की ओर खींचता है और मानसून आगे बढ़ता है। लेकिन मौजूदा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इस प्राकृतिक रास्ते को बाधित कर सकता है।



“चिकन एंड एग” जैसी स्थिति क्यों बनी?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल स्थिति “चिकन एंड एग” जैसी हो गई है। अगर मानसून तय समय पर मजबूत पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के साथ पहुंच गया होता, तो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इतनी दक्षिण दिशा तक नहीं आ पाता लेकिन भारत मौसम विभाग के मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यह सिस्टम 1 जून तक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है, जो इस मौसम के हिसाब से असामान्य माना जा रहा है।



मानसून के खिलाफ काम कर रही हैं उत्तर-पश्चिमी हवाएं

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पहले समुद्री परिस्थितियां मानसून के लिए अनुकूल नहीं थीं, तो अब जमीन के ऊपर का वातावरण भी प्रतिकूल होता दिख रहा है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के साथ आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं मानसून की नमी भरी पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हवाओं को कमजोर कर सकती हैं। यही वजह है कि मानसून की प्रगति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।



गर्मी से राहत दे सकती हैं आंधी और बारिश

हालांकि इस सिस्टम का एक सकारात्मक असर भी देखने को मिल सकता है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में बुधवार को तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। अब वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है, जिससे भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। IMD ने गुरुवार सुबह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस को उत्तर पाकिस्तान के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में चिन्हित किया। इसके धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम भारत की तरफ बढ़ने और फिर पूर्व व दक्षिण दिशा में फैलने की संभावना है।



बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर कमजोर पड़ सकता है

मौसम में एक और बड़ा बदलाव यह है कि पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बनने वाला संभावित कम दबाव का क्षेत्र अब कमजोर पड़ सकता है या पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं अब बंगाल की खाड़ी के रास्ते फिलीपींस के पास पश्चिमी प्रशांत महासागर की ओर मुड़ सकती हैं। वहां ये हवाएं बन रहे ‘जांगमी’ तूफान को और ताकत दे सकती हैं।



किसानों और मौसम विभाग की नजर मानसून पर

मानसून की एंट्री में देरी और मौसम के बदलते पैटर्न को देखते हुए किसानों और मौसम वैज्ञानिकों की नजर अगले कुछ दिनों के घटनाक्रम पर टिकी हुई है। खासतौर पर खरीफ फसलों की बुवाई मानसून की प्रगति पर काफी हद तक निर्भर करती है।

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