गेहूं की फसल में आग का खतरा: किसानों के लिए बचाव के उपाय और बिजली विभाग की भूमिका
Fire prevention for farmers: गेहूं की सुनहरी फसल का पकना किसानों के लिए खुशी लाता है, लेकिन मार्च-अप्रैल में जिस प्रकार लगातार तापमान बढ़ रहा है और तेज हवाएं चल रही हैं उससे आग का खतरा 80% तक बढ़ जाता हैं, जिससे साल भर की मेहनत पर पानी फिर सकता है। देश में 65% गेहूं खेतों में आग पुराने बिजली ट्रांसफार्मर और ढीले तारों के शॉर्ट-सर्किट से लगती है, जहाँ जर्जर तार टकराने से निकली चिंगारी सूखी फसल को पल भर में राख कर देती है।
प्राकृतिक आपदा से खेतों को कैसे बचाएं?
इस प्राकृतिक और तकनीकी आपदा से बचने के लिए किसानों को अपने खेत की बिजली व्यवस्था पर ध्यान देना, बिजली विभाग से संपर्क में रहना, मानवीय लापरवाही से बचना और फसल कटाई यंत्रों की जाँच करनी चाहिए। साथ ही, खेत के चारों ओर खाली पट्टी बनाकर आग को फैलने से रोकना एक प्रभावी उपाय है।
मार्च-अप्रैल में क्यों बढ़ जाती है 80 प्रतिशत आग लगने की घटनाएं?
मार्च और अप्रैल में तापमान बढ़ने से खेतों की नमी खत्म हो जाती है। ऐसे में तेज हवाएं चलने से आग लगने की आशंका 80% तक बढ़ जाती है। यह किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। देश में गेहूं के खेतों में आग लगने की 65% घटनाएं बिजली के पुराने ट्रांसफार्मर और ढीले तारों में शॉर्ट-सर्किट के कारण होती हैं। जब खराब तार आपस में टकराते हैं, तो उनसे निकली चिंगारी सूखी फसल को तुरंत जला देती है। यह आग सिर्फ फसल का नुकसान नहीं करती, बल्कि किसान की मेहनत की कमाई, भारी लागत और उसके भविष्य के सपनों को भी तबाह कर देती है।
क्या-क्या बरतें सावधानी?
खेत की बिजली व्यवस्था पर ध्यान: इस मुश्किल से बचने के लिए किसानों को सबसे पहले अपने खेत की बिजली व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। अगर खेत के पास ट्रांसफार्मर है, तो फसल पकने पर उसके आसपास की कम से कम 10 फीट की फसल पहले ही काट लें और उस जगह को साफ कर दें। इससे ट्रांसफार्मर से निकलने वाली चिंगारी से फसल जलने का खतरा कम हो जाएगा।
बिजली विभाग के संपर्क में रहें: इसके अलावा, बिजली विभाग से लगातार संपर्क में रहें। अगर कहीं तार ढीले या खराब दिखें, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
खेतों की मेड़ को रखें साफ: मानवीय लापरवाही भी आग लगने का एक बड़ा कारण है। राहगीर या मजदूर अगर गलती से जलती बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली फेंक दें, तो सूखे खेतों में आग लग सकती है। खेत की मेड़ और आसपास की जगह को साफ रखने से यह खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
कंबाइन और थ्रेशर जैसी मशीनों की नियमित कराएं जाँच: फसल कटाई में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक यंत्र जैसे कंबाइन और थ्रेशर भी आग का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इन मशीनों की बेल्ट की कसावट की नियमित जांच करना बहुत जरूरी है। अगर बेल्ट ढीली है, तो घर्षण से चिंगारी निकल सकती है और सूखी फसल में आग लग सकती है।
ट्रैक्टर से निकलने वाली चिंगारी से करे बचाव: ट्रैक्टर के साइलेंसर का मुंह हमेशा ऊपर की ओर रखें। मशीनों को उनकी क्षमता से ज्यादा ओवरलोड न करें, ताकि इंजन से निकलने वाली चिंगारी सीधे जमीन पर न गिरे।
खेत के चारों ओर मेड़ बचाएगी आग से: एक बहुत ही आसान और असरदार तरीका है कि खेत के चारों ओर 5 से 6 फीट चौड़ी खाली पट्टी बना दें। या फिर ट्रैक्टर के पीछे रोटावेटर चलाकर मेड़ों के पास जुताई कर दें। यह खाली जमीन आग को एक खेत से दूसरे खेत में फैलने से रोकती है।
सही समय पर करें बुवाई, देरी ना करें
फसल की सही समय पर कटाई करना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा मंत्र है। जैसे ही गेहूं की बालियां पूरी तरह पीली हो जाएं और दाने सख्त हो जाएं, कटाई में बिल्कुल देर न करें। ज्यादा समय तक खेत में खड़ी सूखी फसल न सिर्फ आग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती है, बल्कि चूहे और पक्षी भी उसे नुकसान पहुंचाते हैं। जिन खेतों में सिंचाई नहीं होती, उनकी कटाई पहले करें, क्योंकि वहाँ फसल जल्दी सूख जाती है। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए खेत पर हमेशा पानी की भरी हुई टंकियां और रेत की बोरियां तैयार रखें। इससे आग लगने पर उसे शुरुआत में ही बुझाया जा सकता है। साथ ही कृषि विभाग और बिजली निगम के बीच अच्छा तालमेल और किसानों की अपनी सतर्कता ही उनकी मेहनत को सुरक्षित खलिहान तक पहुंचा सकती है।