गेहूँ के दाम में ₹150 प्रति क्विंटल तक उछाल, सरकार ने 4 साल बाद निर्यात खोला; ग्लोबल कीमतें 3 साल के उच्च स्तर पर
सरकार की ओर से गेहूँ और इससे बने उत्पादों के निर्यात पर लगी चार साल पुरानी रोक हटाए जाने के बाद घरेलू मंडियों में गेहूँ के दाम तेज़ी से बढ़े हैं। 24 अगस्त को गेहूँ, आटा, मैदा और सूजी के निर्यात की अनुमति मिलने के बाद भारतीय गेहूँ की कीमतों में 150 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूँ की कीमतें करीब तीन साल के उच्च स्तर पर पहुँच गई हैं। रूस के गेहूँ निर्यात पर ब्लैक सी क्षेत्र में जारी हमलों का असर और इस साल कई देशों में कम उत्पादन की आशंका ने वैश्विक कीमतों को सहारा दिया है।
'बिजनेस लाइन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबार के एक हिस्से को चिंता है कि निर्यात खुलने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के बीच भारत में गेहूँ के दाम और बढ़ सकते हैं। खासकर आगामी रबी फसल पर अल नीनो के संभावित असर को लेकर चिंता है। वैश्विक एजेंसियों ने अल नीनो के मार्च 2027 तक बने रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, कारोबारियों का दूसरा वर्ग मानता है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारतीय गेहूँ अंतरराष्ट्रीय बाजार में अभी भी महंगा है। घरेलू बाजार में बढ़ी कीमतों का असर अभी खुदरा बाजार में साफ़ नहीं दिखा है, लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका असर जल्द दिखाई दे सकता है।
यूपी की मंडियों में भी बढ़े गेहूँ के दाम
उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों में गेहूँ की कीमतों में हाल के दिनों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। लखनऊ की कृषि टर्मिनल मंडी में गेहूँ का भाव 17 अगस्त के 2,466 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,640 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख गेहूँ उत्पादक केंद्र हरदोई में दारा किस्म का मॉडल भाव 17 अगस्त को 2,408.21 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 1 सितंबर को बढ़कर 2,553.31 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। यानी इस दौरान करीब 145 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई।
केंद्र सरकार ने 36 मिलियन टन गेहूँ की खरीद की है। वहीं मक्का के दाम भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में अल नीनो का खतरा बना हुआ है और निर्यात की अनुमति दिए जाने को लेकर चिंता है। हालांकि, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, इस साल देश में गेहूँ का उत्पादन रिकॉर्ड 120.66 मिलियन टन रहने का अनुमान है। पिछले साल उत्पादन 117.95 मिलियन टन था। भारतीय खाद्य निगम के आँकड़ों के अनुसार, 1 अगस्त तक देश में गेहूँ का भंडार 50.53 मिलियन टन था, जो पाँच साल का सबसे ऊँचा स्तर है।
भारतीय गेहूँ महंगा, निर्यात से बड़ी मात्रा में कमाई की उम्मीद कम
कांडला में भारतीय गेहूँ का एफओबी भाव करीब 325 डॉलर प्रति टन है, जबकि दूसरे देशों में यह 295 डॉलर या उससे कम है। इसलिए घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी भले ही निर्यात की उम्मीद में हुई हो, लेकिन भारत से बड़े पैमाने पर गेहूँ बाहर जाने की संभावना फिलहाल कम है।
उधर, उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के अनुसार, देश में गेहूँ का औसत खुदरा भाव 31.58 रुपये प्रति किलो है। अलग-अलग बाजारों में इसकी कीमत 22 रुपये से लेकर 55 रुपये प्रति किलो तक है। मंडियों में बढ़े दाम का असर खुदरा बाजार में अभी पूरी तरह नहीं आया है।
ब्लैक सी संकट से ग्लोबल गेहूँ महंगा, उत्पादन घटने की भी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) पर बुधवार को गेहूँ 7.54 डॉलर प्रति बुशल यानी करीब 277 डॉलर प्रति टन पर कारोबार कर रहा था। ब्लैक सी क्षेत्र में रूस पर नए हमलों के कारण उसके गेहूँ निर्यात पर असर पड़ने की आशंका से कीमतों में तेजी आई है। मौसम संबंधी समस्याओं के कारण उत्पादन घटने की चिंता ने भी कीमतों को फरवरी 2023 के बाद के सबसे ऊँचे स्तर के करीब पहुँचा दिया है।
इसी तरह मक्का की कीमत भी तीन साल के उच्च स्तर पर पहुँच गई है। बुधवार को मक्का 5.15 डॉलर प्रति बुशल यानी करीब 202 डॉलर प्रति टन पर था। अमेरिका में फसल कमजोर रहने की आशंका इसके पीछे प्रमुख कारणों में है। अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद ने 2026-27 में वैश्विक गेहूँ उत्पादन 817 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है, जबकि मौजूदा सीजन में यह 844 मिलियन टन था। दूसरी ओर, खपत 3 मिलियन टन बढ़कर 826 मिलियन टन पहुँचने का अनुमान है। वैश्विक गेहूँ का बचा हुआ भंडार भी 10 मिलियन टन घटकर 275 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
ऑस्ट्रेलिया में 2026-27 में गेहूँ उत्पादन 17 प्रतिशत घटकर 29.9 मिलियन टन रहने की रिपोर्ट है। 'बिजनेस लाइन' ने विश्लेषकों के हवाले से रिपोर्ट किया कि ब्लैक सी क्षेत्र से निर्यात में रुकावट वैश्विक कीमतों को आगे भी सहारा दे सकती है। रूसी गेहूँ विश्लेषक आंद्रेई सिज़ोव ने अनुमान जताया है कि अगस्त में रूस का गेहूँ निर्यात घटकर 2010 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया होगा। उस समय रूस से करीब 1.6 मिलियन टन गेहूँ भेजा गया था।
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने 2026 में अमेरिका का गेहूँ उत्पादन 41.64 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है, जो 2025 के मुकाबले 23 प्रतिशत कम और 1970 के बाद सबसे निचला स्तर होगा। ऐसे में भारत में निर्यात खुलने, घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी और दुनिया भर में उत्पादन व आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के बीच गेहूँ बाजार पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।