Wheat Export: गेहूं एक्सपोर्ट कोटा बचाना है तो ध्यान दें! सरकार ने मांगा इस्तेमाल का हिसाब, जानें नई डेडलाइन

Mansi | Aug 10, 2026, 18:55 IST
डीजीएफटी ने गेहूँ निर्यात कोटे की नए दिशा-निर्देशों की शुरुआत की है। निर्यातक अब 26 अगस्त तक अपने कोटे के उपयोग की जानकारी प्रदान करने के लिए तैयार रहें। इसके बाद, 31 अगस्त तक अतिरिक्त कोटे के लिए आवेदन किया जा सकेगा। यदि कोई निर्यातक 50% से अधिक कोटा इस्तेमाल करता है, तो उनकी मांग पर विचार किया जाएगा।

गेहूँ के निर्यात से जुड़े कारोबारियों के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने नई प्रक्रिया शुरू की है। सरकार अब पहले से दिए गए गेहूँ एक्सपोर्ट कोटे की समीक्षा करेगी और यह देखा जाएगा कि किस निर्यातक ने अपने हिस्से का कितना कोटा इस्तेमाल किया है। जो मात्रा इस्तेमाल नहीं हुई है, उसे ज़रूरत के हिसाब से दूसरे निर्यातकों को देने पर विचार किया जा सकता है।



डीजीएफटी ने यह जानकारी 10 अगस्त 2026 को जारी ट्रेड नोटिस नंबर 18/2026-27 के ज़रिए दी है। यह व्यवस्था HS Code 10011900 और 10019910 के तहत दिए गए गेहूँ निर्यात कोटे से संबंधित है। निर्यातकों को तय समय के भीतर अपने कोटे के इस्तेमाल और अतिरिक्त आवश्यकता से जुड़ी जानकारी देनी होगी।



26 अगस्त तक बताना होगा कितना कोटा हुआ इस्तेमाल

जिन निर्यातकों को पहले गेहूँ निर्यात का कोटा मिला है, उन्हें 26 अगस्त 2026 तक उसकी उपयोगिता की जानकारी देनी होगी। इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से जारी उपयोग प्रमाण पत्र (Utilisation Certificate) देना होगा। इस प्रमाणपत्र में अब तक किए गए गेहूँ निर्यात की मात्रा स्पष्ट करनी होगी। साथ ही संबंधित शिपिंग बिल की जानकारी भी देनी होगी, ताकि निर्यात की गई मात्रा का सत्यापन किया जा सके।



ज़्यादा गेहूँ चाहिए तो 31 अगस्त तक करें आवेदन

अगर किसी निर्यातक को मौजूदा कोटे से अधिक गेहूँ की आवश्यकता है, तो वह अतिरिक्त कोटे के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए 31 अगस्त 2026 तक आवेदन करना होगा। आवेदन में अतिरिक्त गेहूँ की ज़रूरत की वजह और उसका उचित आधार बताना होगा। अगर उपलब्ध हो, तो वैध एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट या क्रयादेश परचेस आर्डर की प्रति भी जमा करनी होगी। इसके अलावा डीजीएफटी के ऑनलाइन पोर्टल पर अमेंडमेंट एप्लीकेशन दाखिल करना भी ज़रूरी होगा।



50% से ज़्यादा कोटा इस्तेमाल करने वालों पर विचार

डीजीएफटी ने कोटे के इस्तेमाल के आधार पर अलग-अलग स्थिति स्पष्ट की है। जिन निर्यातकों ने अपने आवंटित कोटे का 50 % से अधिक इस्तेमाल किया है, उनकी अतिरिक्त गेहूँ की मांग पर विचार किया जा सकता है। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अतिरिक्त कोटा अपने आप मिल जाएगा। निर्यातक की वास्तविक ज़रूरत, उपलब्ध कोटा और जमा किए गए दस्तावेज़ों को देखकर फैसला लिया जाएगा।



कम इस्तेमाल हुआ कोटा वापस लिया जा सकता है

अगर किसी निर्यातक ने अपने आवंटित कोटे का 50 % से कम इस्तेमाल किया है, तो बची हुई मात्रा की समीक्षा की जाएगी। ऐसी अनुपयोगी मात्रा को वापस लेकर कॉमन पूल में शामिल किया जा सकता है। हालाँकि, अगर निर्यातक के पास वैध एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट या परचेस आर्डर है और उसने निर्धारित दस्तावेज़ जमा किए हैं, तो उसके मामले पर अलग से विचार किया जा सकता है।



कॉमन पूल से दोबारा होगा आवंटन

वापस लिए गए गेहूँ के कोटे को कॉमन पूल में शामिल करने के बाद डीजीएफटी उपलब्ध मात्रा का नए सिरे से आवंटन कर सकता है। इसमें निर्यातकों की वास्तविक आवश्यकता और उनके दस्तावेज़ों को आधार बनाया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि जिस निर्यातक के पास वैध कारोबारी दस्तावेज़ और निर्यात की वास्तविक ज़रूरत होगी, उसे उपलब्ध कोटे के आधार पर अतिरिक्त मात्रा मिलने का मौका मिल सकता है।



समय सीमा चूकने पर आवेदन हो सकता है ख़ारिज

डीजीएफटी ने निर्यातकों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखने को कहा है। अतिरिक्त कोटे के लिए आवेदन 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करना होगा। दस्तावेज़ अधूरे होने, ऑनलाइन आवेदन नहीं करने या तय तारीख के बाद आवेदन देने पर अनुरोध पर विचार नहीं किया जा सकता है।



तय समय पर कोटे के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी नहीं देने वाले निर्यातकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है। इसमें अनुपयोगी कोटे को वापस लेना और भविष्य में निर्यात अनुमति पर रोक जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। निर्यातकों को मांगी गई जानकारी डीजीएफटी की ओर से दिए गए निर्धारित ई-मेल पर भेजनी होगी।



पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गेहूँ निर्यात के लिए आवंटित कोटा बेवजह इस्तेमाल हुए बिना न पड़ा रहे।डीजीएफटी पहले यह देखेगा कि किस निर्यातक ने कितना कोटा इस्तेमाल किया है और किसे वास्तव में अतिरिक्त मात्रा की ज़रूरत है। इसके बाद उपलब्धता और दस्तावेज़ों के आधार पर बचे हुए कोटे को दोबारा आवंटित किया जा सकता है। यानी कम इस्तेमाल करने वालों का बचा कोटा ज़रूरतमंद निर्यातकों तक पहुँचाने की कोशिश की जाएगी।

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