Wheat Procurement: MP के गेहूं खरीद आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, पोर्टल पर ‘शून्य खरीद’; CM मोहन यादव ने किया केंद्र का निरीक्षण

Preeti Nahar | May 05, 2026, 18:06 IST
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देश के 11 राज्यों में गेहूं खरीद का काम धूमधाम से चल रहा है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खेतों में किसानों की मेहनत रंग ला रही है। लेकिन मध्य प्रदेश की स्थिति थोड़ी अलग है, जहाँ अभी तक कोई खरीद नहीं हुई है। जानिए क्या कह रहे हैं Central Food Grains Procurement Portal की रिपोर्ट के आंकड़ें।

Zero Wheat Procurement in MP: देशभर में रबी विपणन सीजन के तहत 4 मार्च से 11 राज्यों में गेहूं खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस बार केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से लेकर बिहार, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत 11 राज्यों में 3.45 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। खरीद प्रक्रिया 30 जून तक चलेगी।



केंद्रीय सरकार के सेंट्रल फूड ग्रेन प्रोक्योरमेंट पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक 4 मई शाम 6 बजे तक देशभर में 1.39 करोड़ टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। गेहूं बेचने के लिए 37 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन अब तक सिर्फ 10.58 लाख किसानों से ही खरीद हो पाई है।



देशभर में खरीद के लिए 291 शहरों में 18,483 खरीद केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक केवल 203 शहरों के 9,765 केंद्रों पर ही किसान गेहूं बेचने पहुंचे हैं। यह दिखाता है कि कई राज्यों में खरीद की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है।



मध्य प्रदेश में पोर्टल पर ‘शून्य खरीद’

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सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के आंकड़ों को लेकर हो रही है। सेंट्रल फूड ग्रेन प्रोक्योरमेंट पोर्टल के अनुसार राज्य में इस बार 1 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 15 मार्च से 30 जून तक का समय तय किया गया है और 3,585 खरीद केंद्र बनाए गए हैं।



हैरानी की बात यह है कि पोर्टल पर 5 मई सुबह तक मध्य प्रदेश में गेहूं का एक दाना भी खरीदा नहीं दिखाया गया। जबकि मध्य प्रदेश देशभर में अपने शरबती गेहूं के लिए जाना जाता है। पिछले साल राज्य में 78 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि प्रदेश में रोजाना किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है।



CM मोहन यादव ने किया औचक निरीक्षण

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इसी बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने सोमवार को उज्जैन के दताना स्थित अडानी एग्रो साइलो उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण किया और किसानों से सीधे बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपने-अपने खरीद केंद्रों पर जाकर तौल और अन्य प्रक्रियाओं में आसानी से भाग लें। उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसकी लगातार निगरानी की जा रही है।



सीएम ने यह भी कहा कि गेहूं के साथ-साथ चना और मसूर की खरीद भी जारी है और सरकार का प्रयास है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से समय पर पूरी हो। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि खरीद प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी हो तो वे जिला प्रशासन से संपर्क करें।



पंजाब में सबसे तेज खरीद

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Central Food Grains Procurement Portal की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 1 अप्रैल से 15 मई तक 1.22 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। 4 मई तक यहां 1.05 करोड़ टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। राज्य में 9.64 लाख किसानों से खरीद होनी है, जिनमें से अब तक 6.88 लाख किसानों से गेहूं खरीदा जा चुका है। पंजाब में 2,806 खरीद केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 2,600 केंद्रों पर खरीद जारी है।



हरियाणा में भी खरीद जारी- हरियाणा में 1 अप्रैल से 15 मई तक 72 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया गया है। 4 मई तक यहां 25.88 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। राज्य में 9.45 लाख किसानों से खरीद होनी है और अब तक 2.26 लाख किसानों से खरीद की जा चुकी है। यहां 668 खरीद केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 534 केंद्रों पर खरीद हो रही है।



यूपी में भी खरीद की रफ्तार धीमी- उत्तर प्रदेश में 17 मार्च से 15 जून तक गेहूं खरीद होनी है। राज्य में 5.64 लाख किसानों से खरीद का लक्ष्य है, लेकिन अब तक सिर्फ 1.38 लाख किसानों से ही गेहूं खरीदा गया है। यूपी में 25 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है और 4 मई तक 7.78 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। राज्य के सभी 75 जिलों में खरीद प्रक्रिया जारी है।



पिछले साल क्या था हाल?

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रबी सीजन 2025-26 में 10 मार्च से 30 जून तक गेहूं खरीद हुई थी। उस दौरान 38.90 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन सिर्फ 23.90 लाख किसानों से ही खरीद हो पाई थी। उस समय 3.33 करोड़ टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था, जबकि कुल 3 करोड़ टन गेहूं की खरीद हुई थी। खरीद के लिए 18,953 केंद्र बनाए गए थे, लेकिन केवल 13,939 केंद्रों पर ही खरीद हो पाई थी।



क्या है बड़ा सवाल?

इस बार भी कई राज्यों में खरीद की रफ्तार धीमी है। सबसे बड़ा सवाल मध्य प्रदेश को लेकर है, जहां पोर्टल पर खरीद शून्य दिखाई दे रही है, जबकि राज्य सरकार लगातार खरीद होने का दावा कर रही है। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में खरीद प्रक्रिया कितनी तेज होती है।

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