गेहूं उत्पादन 2025-26 पर सरकार का अपडेट: मौसम की मार के बावजूद फसल मजबूत, किसी भी प्रमुख कीट या रोग की घटना दर्ज नहीं
2025-26 के गेहूं उत्पादन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया है कि है कि देश में गेहूं की स्थिति उतनी कमजोर नहीं है, जितनी कुछ रिपोर्टों में बताई जा रही है। मौसम की चुनौतियों, फरवरी की गर्मी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद किसानों की समय पर बुवाई, बढ़े हुए रकबे और उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से फसल मजबूत बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल गेहूं की बुवाई करीब 33.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि खरीद और मंडी आवक के रुझान भी सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं।साथ ही बताया गया कि फसल में कहीं भी बड़े स्तर पर कीट या रोग का प्रकोप दर्ज नहीं किया गया।
मौसम ने बढ़ाई चिंता, लेकिन नुकसान सीमित
रबी सीजन के अंतिम दौर में फरवरी महीने में सामान्य से ज्यादा तापमान दर्ज किया गया, जिससे कुछ इलाकों में दाना भरने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। वहीं कुछ क्षेत्रों में कटाई के समय बारिश और ओलावृष्टि से गुणवत्ता तथा उपज पर असर की आशंका रही। हालांकि इसका प्रभाव सीमित क्षेत्रों तक माना जा रहा है।
इन कारणों से फसल रही मजबूत
1. समय पर बुवाई का फायदा- किसानों ने इस बार जल्दी और समय पर गेहूं की बुवाई की, जिससे फसल तेज गर्मी के असर से काफी हद तक बच गई।
2. रकबे में बढ़ोतरी- साल 2025-26 में गेहूं का क्षेत्रफल पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 0.6 मिलियन हेक्टेयर बढ़ा, जिससे स्थानीय नुकसान की भरपाई संभव हुई।
3. नई किस्मों का असर- उच्च पैदावार देने वाली, गर्मी सहनशील और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बढ़ते इस्तेमाल से उत्पादन को मजबूती मिली है।
4. कीट और रोग का प्रकोप नहीं- सरकार के अनुसार इस सीजन गेहूं की फसल में किसी बड़े कीट या बीमारी की घटना दर्ज नहीं हुई, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ा।
राज्यों से अच्छे उत्पादन के संकेत
हरियाणा- राज्य की मंडियों में गेहूं आवक सरकार के 75 लाख मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य से आगे निकल चुकी है। अब तक 56.13 लाख मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है, जो पिछले साल से करीब 9 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है।
मध्य प्रदेश- अच्छी पैदावार के अनुमान को देखते हुए राज्य का खरीद लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।
महाराष्ट्र- राज्य में 2025-26 के लिए गेहूं उत्पादन करीब 22.90 लाख टन रहने का अनुमान है। मराठवाड़ा और विदर्भ से मंडियों में अच्छी आवक दर्ज की गई है।
सरकार ने दोहराया है कि कुछ क्षेत्रों में मौसम का असर जरूर पड़ा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं उत्पादन स्थिर और मजबूत बना हुआ है। बढ़ा हुआ रकबा, आधुनिक खेती तकनीक और बेहतर किस्मों ने इस साल उत्पादन को सहारा दिया है।