गेहूं उत्पादन अनुमान 10 मिलियन टन तक घटने के संकेत, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि बनी वजह

Gaon Connection | Apr 25, 2026, 10:58 IST
इस साल गेहूं की फसल पर मौसम की मार का असर साफ नजर आ रहा है। अनियोजित बारिश और ओले ने ज़मीन पर काफी बुरा असर डाला है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों को लेकर अब संशय की स्थिति बनी हुई है। खाद्य सचिव ने संकेत दिया है कि उत्पादन 110 से 120 मिलियन टन के बीच हो सकता है।
बेमौसम बारिश से गेहूं उत्पादन अनुमान में कमी

देश में इस साल गेहूं उत्पादन के अनुमान पर मौसम की मार पड़ती दिख रही है। मार्च और अप्रैल के दौरान कई राज्यों में हुई बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने पककर तैयार खड़ी फसल को नुकसान पहुँचाया है। इसके चलते सरकार और उद्योग जगत के अनुमान में अंतर सामने आया है। अब माना जा रहा है कि वास्तविक उत्पादन शुरुआती रिकॉर्ड अनुमान से कम रह सकता है।



रिकॉर्ड उत्पादन अनुमान पर संशय

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी इस वर्ष गेहूं उत्पादन का अनुमान 110.65 मिलियन टन लगाया है, जो पिछले वर्ष के 109.63 मिलियन टन से मामूली अधिक है। कृषि मंत्रालय ने पहले 2025-26 सीजन के लिए गेहूं उत्पादन 120.21 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया था, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा था। लेकिन हाल की मौसमीय घटनाओं के बाद खाद्य सचिव ने संकेत दिया है कि वास्तविक उत्पादन 110 से 120 मिलियन टन के बीच रह सकता है। इससे साफ है कि मौसम ने उत्पादन क्षमता पर असर डाला है।



किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य हैं। कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा इन्हीं राज्यों से आता है। मार्च से मध्य अप्रैल के बीच इन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश और कई जगह ओलावृष्टि दर्ज की गई, जिससे कटाई के समय फसल को नुकसान पहुंचा। कई क्षेत्रों में दानों की चमक, गुणवत्ता और वजन पर असर पड़ने की भी आशंका है।



किसानों की बढ़ी चिंता

जहाँ फसल कटाई के लिए तैयार थी, वहाँ बारिश और तेज हवाओं से गेहूं खेतों में गिर गया। इससे कटाई लागत बढ़ सकती है और उत्पादन घट सकता है। कुछ राज्यों में किसानों ने मुआवजे और खरीद मानकों में राहत की मांग की है, ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।



सरकारी खरीद पर भी असर संभव

सरकारी एजेंसियों ने इस सीजन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया है, लेकिन उत्पादन कम रहने और गुणवत्ता प्रभावित होने से खरीद लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि कई राज्यों में खरीद मानकों में कुछ ढील देने पर विचार किया गया है, ताकि किसानों को मंडियों में परेशानी न हो।



राहत की बात: भंडार पर्याप्त

उत्पादन अनुमान घटने के बावजूद फिलहाल देश में गेहूं की उपलब्धता को लेकर बड़ी चिंता नहीं है। सरकारी गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जो घरेलू मांग को संभाल सकता है। पिछले साल की अच्छी फसल का फायदा इस बार मिल सकता है।



आगे क्या?

रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के अनुसारअंतिम उत्पादन आंकड़े कटाई पूरी होने और राज्यों से रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होंगे। लेकिन यह घटना फिर संकेत देती है कि बदलता मौसम कृषि उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले समय में मौसम-रोधी खेती और बेहतर फसल सुरक्षा व्यवस्था पर जोर बढ़ सकता है।

Tags:
  • Wheat Production
  • Unseasonal Rain
  • बेमौसम बारिश
  • गेहूं उत्पादन अनुमान
  • गेहूं फसल नुकसान
  • बेमौसम बारिश असर
  • ओलावृष्टि से फसल बर्बाद
  • भारत गेहूं उत्पादन 2026
  • wheat production India
  • Wheat Production Estimate Reduced