किसानों के काम की ख़बर, मध्य प्रदेश में गेहूँ खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू

Gaon Connection | Feb 04, 2026, 15:56 IST
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रबी खरीद वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीद प्रक्रिया ज़ल्द ही शुरू हो जाएगी, इसके लिए किसानों को पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा, तभी उन्हें एमएसपी का फायदा मिल पाएगा।

<p>इस व्यवस्था से किसानों को तय दाम की गारंटी मिलती है, बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है और फसल की बिक्री सुरक्षित तरीके से हो पाती है।<br></p>

रबी खरीद वर्ष 2026-27 में गेहूं बेचने वाले किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया 07 फरवरी 2026 से शुरू कर दी है। जो किसान अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचना चाहते हैं, उनके लिए पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।



इस बार गेहूं का एमएसपी ₹2585 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित और सुरक्षित दाम मिल सके।



सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े और उपार्जन केंद्रों के माध्यम से सीधे उनकी उपज की खरीद हो। पंजीयन पूरा होने के बाद ही किसान एमएसपी पर सरकारी खरीद का लाभ ले सकेंगे।



किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन की दो व्यवस्थाएं रखी गई हैं। निशुल्क पंजीयन ग्राम पंचायत, जिला पंचायत, तहसील कार्यालय, सहकारी समितियों और विपणन संस्थाओं के माध्यम से किया जा सकता है। वहीं सशुल्क पंजीयन की सुविधा MP Online, CSC केंद्र, लोक सेवा केंद्र और साइबर कैफे के जरिए उपलब्ध कराई गई है। इससे किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर जाकर आसानी से आवेदन करने का विकल्प मिलेगा।



अंतिम तारीख का रखें ध्यान

सरकार ने पंजीयन की अंतिम तिथि 07 मार्च 2026 तय की है। समय सीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसलिए किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अंतिम दिनों का इंतज़ार न करें और समय रहते पंजीयन पूरा करा लें।



क्यों ज़रूरी है पंजीयन?

एमएसपी पर गेहूं की बिक्री के लिए पंजीयन अनिवार्य होने से सरकारी खरीद में पारदर्शिता बनी रहती है। इससे फर्जी खरीद पर रोक लगती है और सही किसानों तक भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचता है। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर टोकन प्रणाली के तहत व्यवस्थित तरीके से फसल बेचने का मौका मिलता है।



किसानों के लिए क्या है फायदा?

इस व्यवस्था से किसानों को तय दाम की गारंटी मिलती है, बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है और फसल की बिक्री सुरक्षित तरीके से हो पाती है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।



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