गेहूं की गुणवत्ता जाँच के लिए शुरू हुआ सैंपल कलेक्शन अभियान, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार मूल्य
देश में अब गेहूं की खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी जोर बढ़ रहा है। इसी दिशा में ने गेहूं परीक्षण हेतु आधिकारिक सैंपल कलेक्शन अभियान शुरू किया है। यह अभियान PGS-India Natural Farming Certification के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है, जिसमें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और अधिकृत प्रयोगशालाओं का सहयोग लिया जा रहा है। इसका मकसद किसानों के गेहूं की गुणवत्ता जांच कर उन्हें बेहतर बाजार और निर्यात अवसरों से जोड़ना है।
क्या है यह अभियान?
इस पहल के तहत किसानों के खेतों और भंडारित गेहूं से सैंपल लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। परीक्षण के जरिए यह जांच की जाएगी कि गेहूं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर कितना खरा उतरता है। कंपनी का कहना है कि वर्तमान समय में वैश्विक बाजार में वही कृषि उत्पाद टिक पाते हैं जो गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों। ऐसे में किसानों को पहले से तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है।
किन पैरामीटर पर होगी जांच?
अभियान के तहत गेहूं की कई महत्वपूर्ण मानकों पर जांच की जाएगी। इनमें शामिल हैं:
ग्लूटेन और प्रोटीन विश्लेषण
पेस्टिसाइड रेजिड्यू परीक्षण
NPOP भारतीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता जांच
यूरोपीय संघ (EU) मानकों के अनुसार परीक्षण, इन परीक्षणों के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उत्पाद घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी उपयुक्त हो।
किसानों को क्या होगा फायदा?
इस पहल से किसानों को कई स्तर पर लाभ मिल सकता है। अगर गेहूँ गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है तो किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा ऑर्गेनिक और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा, निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं, किसानों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों की जानकारी मिलेगी साथ ही कृषि उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। कई किसान अभी तक केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन इस तरह की पहल उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
ऑर्गेनिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
अभियान का एक बड़ा उद्देश्य प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देना भी है। वर्तमान समय में देश और विदेश दोनों बाजारों में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान सही प्रमाणन और गुणवत्ता परीक्षण के साथ आगे बढ़ते हैं, तो भारतीय गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बना सकता है।
निर्यात के लिए क्यों जरूरी है गुणवत्ता परीक्षण?
यूरोप और कई अन्य देशों में कृषि उत्पादों के लिए बेहद सख्त नियम लागू हैं। वहां पेस्टिसाइड अवशेष, गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर विशेष जांच की जाती है। अगर उत्पाद इन मानकों पर खरे नहीं उतरते तो निर्यात में दिक्कत आती है। ऐसे में यह परीक्षण अभियान किसानों को पहले से तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संपर्क और आगे की प्रक्रिया
कंपनी ने किसानों से अपील की है कि वे अपने सैंपल परीक्षण के लिए जमा करें और गुणवत्ता जाँच प्रक्रिया का हिस्सा बनें। अभियान के तहत अधिक जानकारी, सैंपल कलेक्शन और परीक्षण प्रक्रिया के लिए संपर्क नंबर और ऑनलाइन माध्यम भी उपलब्ध कराए गए हैं।