कर्नाटक में प्रस्तावित AI सिटी के ख़िलाफ़ किसान सड़कों पर, जानिए क्यों हो रहा है विरोध?

Lata Mishra | Jul 24, 2026, 14:58 IST
कर्नाटक के रामनगर में बन रही AI टाउनशिप के लिए किसानों की ज़मीन छिनने का विरोध हो रहा है। करीब 7,431 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि पर 9 गाँवों के 5,700 से ज़्यादा किसान प्रभावित होंगे। वे अपनी ज़मीन और रोज़ी-रोटी बचाने की गुहार लगा रहे हैं, जबकि सरकार इसे विकास और रोज़गार का ज़रिया बता रही है।
कर्नाटक के बिदादी में प्रस्तावित भारत की पहली AI सिटी को लेकर किसानों का विरोध तेज़ हो गया है।

कर्नाटक के रामनगर ज़िले में इन दिनों यही सवाल सबसे ज़्यादा गूँज रहा है। बेंगलुरु के पास प्रस्तावित ग्रेटर बिदादी इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT), जिसे भारत की पहली AI आधारित टाउनशिप के रूप में विकसित करने की योजना है, किसानों के विरोध के कारण चर्चा में है। सरकार का कहना है कि यह परियोजना भविष्य के शहरों की नींव रखेगी। वहीं किसान इसे अपनी खेती और रोज़ी-रोटी पर संकट मान रहे हैं। कर्नाटक सरकार बेंगलुरु के नज़दीक बिदादी क्षेत्र में एक आधुनिक टाउनशिप विकसित करना चाहती है। इस परियोजना में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, आवास और नई तकनीकों पर आधारित सुविधाएँ विकसित करने की योजना है। इसके लिए लगभग 7,431 एकड़ ज़मीन अधिग्रहित की जानी है। यह ज़मीन रामनगर ज़िले के नौ गाँवों में फैली है और इससे करीब 5,700 से अधिक किसान प्रभावित हो सकते हैं।



किसानों की चिंता क्या है?


बिदादी और आसपास के गाँवों के किसान कहते हैं कि जिस ज़मीन को अधिग्रहित किया जा रहा है, वही उनके परिवार की सबसे बड़ी पूँजी है। इसी ज़मीन पर खेती होती है, पशुपालन चलता है और कई परिवार रेशम उत्पादन (सेरिकल्चर) से भी जुड़े हैं। किसानों का कहना है कि एकमुश्त मुआवज़ा मिल भी जाए, तो उससे पीढ़ियों की आजीविका वापस नहीं आ सकती। उनका यह भी आरोप है कि परियोजना को लेकर पर्याप्त बातचीत और सहमति की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इन्हीं मुद्दों को लेकर किसान कई दिनों से धरना-प्रदर्शन और रैलियाँ कर रहे हैं।



सरकार क्या कह रही है?


कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह परियोजना राज्य को नई तकनीक और निवेश का बड़ा केंद्र बनाएगी। सरकार के मुताबिक़ इससे बेंगलुरु पर बढ़ता दबाव कम होगा, बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और लाखों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का यह भी कहना है कि विकास और रोज़गार के नए अवसर तैयार करना समय की ज़रूरत है।



फिलहाल क्या स्थिति है?


किसानों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने की बात कही है। समिति भूमि अधिग्रहण, कानूनी पहलुओं और किसानों की आपत्तियों की जाँच करेगी। फिलहाल परियोजना पर बातचीत जारी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है। विकास की राह में सबसे बड़ा सवाल देश में जब भी कोई बड़ा औद्योगिक या शहरी विकास का प्रोजेक्ट आता है, तब एक सवाल बार-बार सामने खड़ा हो जाता है—क्या विकास खेती की ज़मीन पर ही होगा, या ऐसा रास्ता निकलेगा जिसमें किसानों की आजीविका भी सुरक्षित रहे? बिदादी की AI सिटी इसी बहस का नया उदाहरण बन गई है। एक ओर तकनीक और निवेश का सपना है, तो दूसरी ओर खेत, फसल और उन पर निर्भर हज़ारों परिवारों का भविष्य। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि सरकार और किसानों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Tags:
  • AI City Karnataka
  • Bidadi AI City
  • Greater Bidadi Integrated Township
  • Karnataka Farmers Protest
  • Land Acquisition
  • Agricultural Land
  • Bengaluru
  • AI Township
  • Farmer Protest
  • Rural India