Maharashtra Women Farmers Bill 2026: अब महिला भी कहलाएंगी किसान! महाराष्ट्र ला रहा नया कानून, खेती से जुड़े अधिकारों में होगा बड़ा बदलाव
Legal status for women farmers: महाराष्ट्र सरकार महिला किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। राज्य में महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026 लाने की तैयारी है। इस कानून का सबसे बड़ा उद्देश्य उन महिलाओं को किसान की कानूनी पहचान देना है, जो खेतों में दिन-रात मेहनत करती हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अक्सर उनका नाम किसान के तौर पर दर्ज नहीं होता।
गाँवों में महिलाएं खेती के लगभग हर काम में हिस्सा लेती हैं। बुवाई, रोपाई, निराई-गुड़ाई, कटाई, पशुपालन, बीज संभालने से लेकर फसल बेचने तक महिलाओं की अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद जमीन के कागजों में कई बार उनका नाम नहीं होता, जिससे उन्हें किसान से जुड़ी सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा नहीं मिल पाता।
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, राज्य के कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 80 प्रतिशत से ज्यादा है। इसके बावजूद उन्हें स्वतंत्र किसान के रूप में पहचान मिलने में कई दिक्कतें आती हैं।
क्यों लाया जा रहा है यह बिल?
अभी किसान की पहचान ज्यादातर जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी होती है। अगर जमीन पति, पिता या परिवार के किसी पुरुष सदस्य के नाम पर है तो खेत में काम करने वाली महिला को कई बार किसान नहीं माना जाता। इस वजह से महिलाओं को कई सुविधाओं में परेशानी आती है, जैसे-
- कृषि ऋण लेने में दिक्कत
- सरकारी सब्सिडी का लाभ नहीं मिलना
- फसल बीमा में परेशानी
- कृषि योजनाओं में नाम शामिल न होना, नए बिल के जरिए ऐसी महिलाओं को कानूनी पहचान देने की कोशिश की जा रही है।
7/12 जमीन रिकॉर्ड में नाम जोड़ने पर जोर
महाराष्ट्र में जमीन का रिकॉर्ड 7/12 उतारा किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। लेकिन कई महिला किसानों का नाम इसमें दर्ज नहीं होता।
- 7/12 एक्सट्रैक्ट महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग द्वारा तैयार किया जाने वाला जमीन का एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है। इसे जमीन के मालिकाना हक और खेती से जुड़ी जानकारी के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
- इसमें जमीन का सर्वे नंबर, जमीन मालिक का नाम, खेती का प्रकार, कौन सी फसल उगाई जा रही है और जमीन से जुड़ी दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं।
- प्रस्तावित कानून में इस समस्या को दूर करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि खेती करने वाली महिलाओं की पहचान सरकारी रिकॉर्ड में भी दिखाई दे।
महिला किसानों को मिल सकेंगे ये फायदे
अगर यह बिल लागू होता है तो महिला किसानों को कई स्तरों पर फायदा मिलने की उम्मीद है:
- 1. सरकारी योजनाओं तक आसान पहुंच- महिलाएं कृषि योजनाओं, अनुदान और दूसरी सरकारी सुविधाओं के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगी।
- 2. बैंक लोन में मदद- किसान का दर्जा मिलने से कृषि ऋण और आर्थिक सहायता लेने में आसानी हो सकती है।
- 3. बीमा और सामाजिक सुरक्षा- फसल बीमा और किसान कल्याण योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सकती है।
- 4. खेती से जुड़े फैसलों में अधिकार- महिलाएं खेती से जुड़े फैसलों में ज्यादा मजबूत भूमिका निभा पाएंगी।
देशभर में बढ़ रही है महिला किसानों की भागीदारी
कृषि मंत्रालय के अनुसार, ग्रामीण भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि और इससे जुड़े कामों पर निर्भर हैं। खेती के साथ पशुपालन, डेयरी, बागवानी और अन्य गतिविधियों में भी महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
वहीं, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। मार्च 2026 तक देश में 10,000 FPO योजना के तहत करीब 23.55 लाख महिला किसान पंजीकृत थीं।
महिला किसानों के लिए अलग व्यवस्था की तैयारी
महाराष्ट्र सरकार ने इस बिल का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति भी बनाई थी, जिसमें कृषि और कानून से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति का उद्देश्य महिला किसानों की समस्याओं को समझकर एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
अगर महाराष्ट्र का यह कानून लागू होता है तो यह देश में महिला किसानों की पहचान को लेकर एक बड़ा कदम माना जा सकता है। इससे खेती में महिलाओं के योगदान को सिर्फ मेहनत के रूप में नहीं बल्कि अधिकार और पहचान के रूप में मान्यता मिल सकती है।