महिलाएं संभाल रहीं पशु व्यापार की कमान, तकनीक के सहारे बदल रहीं गाँव की तस्वीर, आत्मनिर्भरता की नई कहानी
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, गोंडा और बहराइच के ग्रामीण इलाकों में पशु व्यापार की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जो काम कभी बिचौलियों और पारंपरिक व्यापारियों तक सीमित था, अब उसे गाँव की महिलाएं अपने आत्मविश्वास और समझदारी से संभाल रही हैं। खासकर बकरी और छोटे पशुओं के व्यापार में महिलाओं की भागीदारी ने एक नई मिसाल पेश की है।
तकनीक से तय हो रही सही कीमत
विलेज लाइवस्टॉक ट्रेड सेंटर (वीएलटीसी) के जरिए यह बदलाव जमीन पर साफ दिखाई देता है। यहाँ तकनीक के इस्तेमाल से पशुओं की लाइव बॉडी वेट और ग्रेडिंग के आधार पर कीमत तय की जाती है। इससे किसानों, खासकर महिलाओं को अपने पशुओं का सही और पारदर्शी दाम मिलने लगा है।
महिलाएं बनीं बदलाव की असली ताकत
इस बदलाव की असली ताकत बनी हैं गाँव की महिलाएं। बाराबंकी के जाफरपुर की रेखा देवी, मुबारकपुर की पिंकी देवी, दलईपुरवा की ममता देवी और बहराइच के इस्लामपुर की रूबी आज इस पहल की अगुआ बनकर सामने आई हैं। कभी अपने पशु औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर रहने वाली ये महिलाएं अब खुद व्यापार की बागडोर संभाल रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
रोजगार के साथ मिला आत्मविश्वास
द गोट ट्रस्ट के सहयोग से संचालित इन केंद्रों ने महिलाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की ताकत भी दी है। अब किसान जब अपने पशु लेकर आते हैं, तो उन्हें एक प्राइस स्लिप दी जाती है-जिसमें पशु का वजन, ग्रेड और कीमत साफ-साफ लिखी होती है। इससे उन्हें यह भरोसा मिलता है कि उनके साथ कोई धोखा नहीं हो रहा।
रोजगार के साथ मिला आत्मविश्वास
गाँव स्तर पर पशुओं को एक जगह इकट्ठा किया जाता है, जहाँ उनकी देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता है। इसके बाद उन्हें बड़े खरीदारों और थोक व्यापारियों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया ने पशु व्यापार को व्यवस्थित करने के साथ-साथ पारदर्शिता भी बढ़ाई है।
एफपीसी से मिल रहा बड़ा सहारा
स्वावलम्बी महिला बकरी पालक एफपीसी की भूमिका भी यहां बेहद अहम है। संगठन से जुड़े सैकड़ों किसानों को अब बेहतर नस्ल, चारा, दवाइयों और बाजार की जानकारी मिल रही है। इससे उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और जीवन स्तर सुधर रहा है।
प्रेरणा बन रहीं गाँव की महिलाएं
इन सबके बीच कई दिल छू लेने वाली कहानियां भी सामने आ रही हैं। जाफरपुर की रेखा देवी बताती हैं कि पहले उन्हें कभी समझ ही नहीं आता था कि उनकी बकरी की सही कीमत क्या है। लेकिन अब वे खुद कीमत तय करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इसी तरह पिंकी देवी और ममता देवी ने भी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। बहराइच की रूबी आज न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं को भी इस काम से जोड़ रही हैं।
विशेषज्ञ की क्या राय?
पशुपालन विशेषज्ञ प्रोफेसर संजीव कुमार का मानना है कि पहले जानकारी के अभाव में महिलाएं अक्सर ठगी का शिकार हो जाती थीं। लेकिन वीएलटीसी जैसे मॉडल ने इस स्थिति को बदल दिया है और महिलाओं को उनका हक दिलाने का काम किया है।
सामाजिक बदलाव की नई कहानी
ग्रामीण उत्तर प्रदेश में महिलाओं के नेतृत्व में पशु व्यापार का यह नया मॉडल सिर्फ एक आर्थिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी कहानी है-जहाँ महिलाएं अब पीछे नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में नजर आ रही हैं। आने वाले समय में यह पहल प्रदेश ही नहीं, पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बन सकती है।