World Milk Day 2026: डेयरी सेक्टर में बड़ा अवसर, सरकार चला रही ये योजनाएं, ₹31.25 लाख तक की सब्सिडी का मौका

Gaon Connection | Jun 01, 2026, 12:48 IST
विश्व दुग्ध दिवस हर वर्ष 1 जून को दूध के पोषण, खाद्य सुरक्षा और डेयरी किसानों के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। डेयरी क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत पशुपालकों को सब्सिडी, प्रोत्साहन राशि, बैंक ऋण और डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

हर वर्ष 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस (World Milk Day) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने वर्ष 2001 में इसकी शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य दूध को एक महत्वपूर्ण वैश्विक खाद्य पदार्थ के रूप में पहचान देना, पोषण में इसकी भूमिका को रेखांकित करना और दुनिया भर के डेयरी किसानों के योगदान का सम्मान करना है। दूध दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण कृषि उपजों में से एक माना जाता है। यह प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का प्रमुख स्रोत है। यही कारण है कि दुग्ध उत्पादन न केवल पोषण सुरक्षा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है।



भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और डेयरी क्षेत्र लाखों किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। ऐसे में यदि आप भी डेयरी कारोबार शुरू करना चाहते हैं, तो उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी, बैंक ऋण और अन्य सुविधाओं का लाभ लेकर अपना डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।



मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना

यह योजना उच्च गुणवत्ता और अधिक दूध देने वाली स्वदेशी गायों के पालन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही है। गिर, साहीवाल, थारपारकर, हरियाणा और गंगातीरी नस्ल की गायों के लिए निर्धारित दूध उत्पादन मानकों को पूरा करने वाले पशुपालकों को 10,000 रुपये से 15,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह योजना प्रदेश के सभी जिलों में लागू है। एक पशुपालक अधिकतम दो गायों पर लाभ प्राप्त कर सकता है और राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में भेजी जाती है।



मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना

स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाने और नस्ल सुधार के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत गिर, साहीवाल, हरियाणा और थारपारकर नस्ल की दो गायों की इकाई स्थापित करने पर 2 लाख रुपये की लागत का अधिकतम 40 प्रतिशत यानी 80 हजार रुपये तक अनुदान दिया जाता है। योजना में 50 प्रतिशत लाभार्थी महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाता है।



मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना

छोटे और मध्यम स्तर पर डेयरी व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक किसानों के लिए यह योजना काफी उपयोगी मानी जा रही है। इसके तहत 10 गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर परियोजना लागत 23.60 लाख रुपये का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 11.80 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। लाभार्थी को 15 प्रतिशत स्वयं निवेश करना होता है जबकि 35 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। अनुदान दो चरणों में दिया जाता है।



नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना

व्यावसायिक स्तर पर डेयरी फार्म स्थापित करने के लिए यह योजना लागू की गई है। प्रदेश के 18 मंडल मुख्यालय वाले जिलों में संचालित इस योजना के तहत 25 गायों की इकाई स्थापित की जा सकती है। परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक यानी अधिकतम 31.25 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान तीन चरणों में जारी किया जाता है। योजना का उद्देश्य बड़े डेयरी उद्यमों को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।

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