ड्रॉपआउट पर सीधा प्रहार! योगी सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में किया लागू, 1 मई से चलेगा विशेष नामांकन अभियान

Gaon Connection | Apr 27, 2026, 11:20 IST
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उत्तर प्रदेश सरकार ने 'स्कूल चलो अभियान' को मिशन मोड पर शुरू किया है। एक मई से विशेष अभियान चलाकर वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। दिव्यांग बच्चों के नामांकन और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को प्राथमिकता दी जाएगी। ड्रॉपआउट रोकने और ट्रांजिशन दर बढ़ाने पर जोर है।
सीएम योगी आदित्‍यनाथ

योगी सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।



1 मई से विशेष अभियान, वंचित बच्चों पर रहेगा फोकस

पहली मई से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह अभियान खास तौर पर उन बच्चों पर केंद्रित होगा, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने, आरटीई के अंतर्गत लॉटरी के माध्यम से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।



ड्रॉपआउट पर सीधा प्रहार, ट्रांजिशन दर बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार ने ड्रॉपआउट और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार की है। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे।



गांव-वार सर्वे और लगातार मॉनिटरिंग पर जोर

जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस अभियान को प्रभावी बनाने की योजना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक गांव, वार्ड और बस्ती स्तर पर सर्वे कर बच्चों को चिह्नित किया जाए और उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। जहां पहले ड्रॉपआउट चिंता का विषय था, अब सरकार घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को स्कूल से जोड़ रही है।

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